राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में अब जांच की आंच श्रीराम जन्मभूमि में तैनात रेडियो ऑपरेशन अधिकारी (आरएमओ) अर्जुन देव तक पहुंच गई है। काउंटिंग रूम में चढ़ावे की गणना के दौरान लगे सीसीटीवी कैमरों के साथ पूरे मंदिर परिसर में लगे करीब 1600 कैमरों की निगरानी की जिम्मेदारी उन्हीं के पास है। ऐसे में एसआईटी व पुलिस यह पता लगा रही है कि इतनी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद करोड़ों रुपये के चढ़ावे की चोरी कैसे होती रही और निगरानी तंत्र कहां नाकाम रहा।

सूत्रों के मुताबिक अर्जुन देव वर्ष 2009 से लगातार अयोध्या में तैनात हैं। इस दौरान कई बार उनके तबादले के आदेश हुए, लेकिन हर बार किसी न किसी स्तर पर रुक गए। हाल में लखनऊ तबादले का आदेश भी निरस्त हो गया था। एसआईटी अब यह भी खंगाल रही है कि आखिर उनके तबादले बार-बार किसके स्तर से रुकवाए गए और एक ही जिले में 17 वर्ष तक तैनाती की वजह क्या रही।

वीआईपी दर्शन व्यवस्था में भी सक्रिय भूमिका

जांच में यह भी सामने आया है कि अर्जुन देव सिर्फ वायरलेस संचार और सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं थे। वह वीआईपी दर्शन व्यवस्था समेत ट्रस्ट के कई कामकाज में भी सक्रिय भूमिका निभाते रहे। एसआईटी उनसे पूछताछ कर चुकी है और अब उनकी जिम्मेदारियों, अधिकार क्षेत्र और ट्रस्ट के पदाधिकारियों से संबंधों की भी पड़ताल की जा रही है।

चंपत को लेकर चर्चा

चंपत राय को लेकर चर्चा है कि वह दिल्ली चले गए हैं। हालांकि एक अधिकारी से इस बारे में बातचीत की गई तो उन्होंने इस बात को नकार दिया है। उनका कहना था कि वह अयोध्या में ही हैं। उधर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी पूरे घटनाक्रम पर अपनी रिपोर्ट तैयार करने की कवायद तेज कर दी है। क्षेत्र प्रचारक अनिल कुमार अयोध्या में संतों, महंतों और मंदिर से जुड़े लोगों से फीडबैक ले रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, उनकी रिपोर्ट के आधार पर ट्रस्ट की नई व्यवस्था और पुनर्गठन पर मंथन आगे बढ़ सकता है।



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