शारदीय नवरात्र की शुरुआत 11 अक्तूबर से होगी। इस बार घट स्थापना के लिए सुबह 6:12 बजे से 10:27 बजे तक शुभ मुहूर्त रहेगा। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:24 बजे से दोपहर 12:52 बजे तक है। ज्योतिषाचार्य वेद प्रकाश प्रचेता ने बताया कि इस बार नवरात्र के पहले दिन घट स्थापना पर हस्त नक्षत्र, शुक्ल योग और गजकेसरी योग का विशेष संयोग बन रहा है। इसे पूजा-पाठ और मांगलिक कार्यों के लिए शुभ माना गया है। प्रतिपदा तिथि में हस्त नक्षत्र और शुक्ल योग का संयोग रहेगा। गुरु और चंद्रमा की स्थिति से गजकेसरी योग भी बनेगा। करीब 28 साल बाद ग्रहों और नक्षत्रों की ऐसी युति बनने का दावा किया जा रहा है।

30 साल बाद शनि का विशेष संयोग

इस बार शनि अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ में स्थित होकर शश योग बना रहे हैं। इसके साथ गुरु और सूर्य की स्थिति भी विशेष मानी जा रही है। ज्योतिष नीरज मिश्रा ने बताया कि इन ग्रहों के संयोग को स्थिरता, निर्णय क्षमता और कार्यों में सफलता से जोड़कर देखा जाता है।

नौ दिन में कई शुभ योग

नवरात्र के दौरान चार से पांच दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और दो दिन अमृत सिद्धि योग बनने का संयोग है। इसके अलावा महाष्टमी और महानवमी पर भी विशेष योग रहेंगे। शुभ मुहूर्त में भूमि, भवन और वाहन की खरीदारी के साथ गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं। इस बार शारदीय नवरात्र रविवार से शुरू हो रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रविवार को नवरात्र शुरू होने पर मां दुर्गा का आगमन हाथी पर माना जाता है। हाथी को सुख-समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना गया है। नवरात्र के पहले दिन मंदिरों में घट स्थापना के साथ मां दुर्गा की पूजा-अर्चना शुरू होगी।

 



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