अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। जेडीए के प्रस्तावित मास्टर प्लान (2031) की गुत्थी पिछले ढाई साल से सुलझ नहीं पा रही है। इस उलझन के चलते प्राधिकरण सीमा में शामिल 62 गांव की तस्वीर भी अधर में फंसी है। यह गांव पहली बार मास्टर प्लान में शामिल किए गए लेकिन मास्टर प्लान शासन स्तर से मंजूर न होने से यहां की जमीनों के भू-उपयोग अंतिम तौर पर तय नहीं हो सके। इसके चलते, यहां तमाम कार्य नहीं हो पा रहे हैं। हालांकि प्राधिकरण अफसरों का दावा है अब जल्द ही मास्टर प्लान को अंतिम मंजूरी मिलने जा रही है।
झांसी विकास प्राधिकरण की नई महायोजना जनवरी 2022 से लागू होनी थी। इसमें झांसी का दायरा 90 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 160 वर्ग किलोमीटर हो गया। प्राधिकरण सीमा की परिधि बढ़कर करीब 732 वर्ग किमी हो गई। प्रस्तावित महायोजना में बढ़ती आबादी को देखते हुए आवासीय क्षेत्र में 35 फीसदी का इजाफा किया गया। वहीं, 62 नए गांव भी पहली बार महायोजना में शामिल हुए। मास्टर प्लान लागू होने से मानचित्र पास कराना भी जरूरी हो जाएगा। इससे जेडीए को भी आय होनी थी। यहां तमाम विकास कार्य भी मास्टर प्लान के मुताबिक ही कराए जाने थे लेकिन पिछले ढाई साल से यह मास्टर प्लान तकनीकी उलझनों में अटका है। इस वजह से इन 62 गांव की तस्वीर साफ नहीं हो पा रही है। जेडीए उपाध्यक्ष आलोक यादव का कहना है प्रस्तावित मास्टर प्लान को अब जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
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आठ हजार भवन स्वामियों को नए मास्टर प्लान से राहत की उम्मीद
प्रस्तावित मास्टर प्लान के लागू होने से महानगर के करीब आठ हजार भवन स्वामियों को राहत मिलने की उम्मीद है। पिछली महायोजना में ग्रीन बेल्ट की वजह से पिछोर, गुमनावारा में बने हजारों भवनों पर संकट आ गया। नए मास्टर प्लान में महानगर के बाहर आठ-आठ किलोमीटर लंबी हरित पट्टिका का प्रस्ताव है। इसके तहत शिवपुरी रोड पर रक्सा, ग्वालियर रोड में अंबाबाय, कानपुर रोड में पारीछा, मऊरानीपुर में बरुआसागर की ओर ग्रीन बेल्ट प्रस्तावित है। इससे इन इलाकों के लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। वर्ष 2022 में जेडीए बोर्ड ने मास्टर प्लान पारित करके शासन को भेज दिया लेकिन प्रस्तावित ग्रीन बेल्ट समेत कई बिंदुओं पर आपत्ति लगा दी गई।
