राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच में एक और अहम पहलू सामने आया है। पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि काउंटिंग रूम में लगे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी कई बार प्रभावी ढंग से नहीं होती थी। आरोप है कि कंट्रोल रूम में कई बार कोई मौजूद नहीं रहता था और मॉनिटरिंग में लापरवाही रहती थी। इसी कमजोरी का फायदा उठाकर आरोपी गणना के दौरान नोट निकाल लेते थे।

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोपियों से पुलिस ने रविवार को छह घंटे तक पूछताछ की है। इस दौरान आरोपियों ने बताया कि ट्रस्ट में नौकरी मिलने के दो-तीन महीने बाद ही छह कर्मचारियों ने चोरी शुरू कर दी थी। शुरुआत में वे 500 रुपये के एक-दो नोट कपड़ों में छिपाकर ड्यूटी खत्म होने पर बाहर ले जाते थे। किसी के पकड़े न जाने पर उनका हौसला बढ़ता गया और बाद में नोटों की गड्डियां और फिर बड़ी रकम निकालने लगे।

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पूछताछ में आरोपियों ने सामूहिक रूप से करीब दो से तीन करोड़ रुपये तक की चोरी करने की बात स्वीकार की है। जांच में यह भी सामने आया है कि सात आरोपियों ने चोरी के पैसों से संपत्तियां खरीदीं। कुछ संपत्तियां अयोध्या के बाहर भी खरीदी गई हैं, जबकि एक आरोपी ने अपने पिता के नाम से जमीन लेने की बात स्वीकार की है।

गिरफ्तारी के बाद भी बरामदगी का दावा

सूत्रों के अनुसार ट्रस्ट की ओर से चार और पांच जून के आसपास आरोपियों के ठिकानों से करीब 79 लाख रुपये नकद और चोरी के आभूषण बरामद कराए गए थे। इसके अलावा गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर अतिरिक्त नकदी भी बरामद होने की जानकारी सामने आई है। आरोपियों के घर से कुछ जेवर भी मिले थे, जिनके सत्यापन की प्रक्रिया चल रही है। जेवर की खरीद या उपहार आदि के साक्ष्य प्रस्तुत करने पर उन्हें परिजनों को लौटाए जाएंगे, नहीं तो चोरी के जेवर मानकर कार्रवाई में शामिल किया जाएगा।



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