इटावा। सिविल जज कोर्ट ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। यह फैसला बैंक खाते और एफडी में जमा 21 लाख रुपये से अधिक की धनराशि के उत्तराधिकार से जुड़ा है। कोर्ट ने उत्तराधिकार अधिनियम के तहत दायर याचिका को स्वीकार करते हुए मृतका के कानूनी वारिसों के बीच धनराशि में हिस्सेदारी तय की है। इसके साथ ही उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी करने का आदेश भी दिया है। मृतका के खाते में जमा रकम पर देय ब्याज भी उत्तराधिकारियों को मिलेगा। यह ब्याज उनके निर्धारित हिस्से के अनुसार दिया जाएगा।
फ्रेंड्स कॉलोनी निवासी जितेंद्र कुमार ने कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उन्होंने बताया कि उनकी मां शांति देवी का निधन 28 जनवरी 2018 को हुआ था। उनकी मां के नाम भारतीय स्टेट बैंक की शास्त्री चौराहा शाखा में धनराशि जमा थी। बचत खाते में 11,17,180 रुपये और 10 लाख रुपये की एफडी थी। कुल 21,17,180 रुपये जमा थे, जिस पर ब्याज भी देय था। याचिका में कानूनी वारिसों का अधिकार निर्धारित करने की मांग की गई थी। कोर्ट ने मृतका के तीन जीवित पुत्रों को धनराशि का एक-एक चौथाई हिस्सा देने का आदेश दिया। इनमें जितेंद्र कुमार, मनोज कुमार सिंह और नागेंद्र सिंह शामिल हैं। मृतका के दिवंगत पुत्र हितेंद्र कुमार सिंह का एक-चौथाई भाग उनके वारिसों में बांटा जाएगा। उनकी पत्नी अंजना सिंह और पुत्र यश प्रताप सिंह को 12वां हिस्सा मिलेगा।
कोर्ट ने आवेदक और विपक्षी को 15 दिनों के भीतर न्यायशुल्क, शपथ पत्र और अंडरटेकिंग दाखिल करने को कहा है। औपचारिकताएं पूरी होने के बाद नियमानुसार उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी होगा। सभी पक्षकारों को एक बंधपत्र भी देना होगा। इसमें भविष्य में किसी अन्य व्यक्ति का अधिकार साबित होने पर धनराशि वापस करने की बाध्यता होगी।
