Muzaffarnagar  वाल्मीकि समाज की वरिष्ठ नेता और जुझारू समाजसेवी कुल्लन देवी के निधन से सामाजिक एवं जनसेवा के क्षेत्र में शोक की लहर है। उनके निधन की खबर सामने आने के बाद समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े लोगों ने गहरा दुःख व्यक्त किया और उनके सामाजिक योगदान को याद किया।

कुल्लन देवी के निधन का समाचार मिलने पर मंत्री कपिल देव अग्रवाल उनके निवास पर पहुंचे। उन्होंने दिवंगत कुल्लन देवी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और शोकाकुल परिवार से मुलाकात कर अपनी संवेदना व्यक्त की। इस दौरान उन्होंने परिजनों को इस कठिन समय में धैर्य और संबल बनाए रखने की बात कही।

कुल्लन देवी की अंतिम यात्रा में मंत्री कपिल देव अग्रवाल स्वयं शामिल हुए। उन्होंने दिवंगत समाजसेवी की अर्थी को कंधा दिया और अंतिम यात्रा में श्मशान घाट तक साथ रहे। मंत्री की इस सहभागिता के दौरान बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि, समाज के गणमान्य नागरिक और विभिन्न वर्गों से जुड़े लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए।

अंतिम यात्रा के दौरान माहौल गमगीन रहा। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी ने यह भी दर्शाया कि कुल्लन देवी का सामाजिक संपर्क केवल एक समुदाय तक सीमित नहीं था।

कुल्लन देवी के निधन पर मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने जताया गहरा शोक

मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कुल्लन देवी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनका जाना सामाजिक क्षेत्र के लिए बड़ी क्षति है। उनके अनुसार कुल्लन देवी केवल वाल्मीकि समाज की नेता के रूप में ही नहीं जानी जाती थीं, बल्कि उन्होंने विभिन्न सामाजिक वर्गों से जुड़े लोगों की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया।

उन्होंने कहा कि कुल्लन देवी ने अपना जीवन समाज के कमजोर, वंचित और जरूरतमंद लोगों के अधिकार, सम्मान और हितों के लिए समर्पित किया। सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों पर वे लगातार मुखर रहती थीं और लोगों की समस्याओं को सामने लाने तथा उनके समाधान के लिए प्रयास करती थीं।

मंत्री के अनुसार कुल्लन देवी का व्यक्तित्व संघर्ष और जनसेवा से जुड़ा रहा। किसी समस्या को लेकर आवाज उठाना हो या जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता के लिए आगे आना हो, वे सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाती थीं।

अंतिम यात्रा में मंत्री ने दिया कंधा, बड़ी संख्या में लोग हुए शामिल

कुल्लन देवी की अंतिम यात्रा में मंत्री कपिल देव अग्रवाल का शामिल होना कार्यक्रम का प्रमुख पहलू रहा। उन्होंने स्वयं अर्थी को कंधा दिया और श्मशान घाट तक अंतिम यात्रा में साथ रहे।

अंतिम यात्रा में समाज के गणमान्य नागरिकों के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि और विभिन्न वर्गों से जुड़े लोग मौजूद रहे। बड़ी संख्या में लोगों ने दिवंगत कुल्लन देवी को अंतिम विदाई दी।

किसी सामाजिक कार्यकर्ता के निधन के बाद अंतिम यात्रा में विभिन्न वर्गों की भागीदारी उस व्यक्ति के सामाजिक संपर्क और सार्वजनिक जीवन से जुड़े होने को भी दर्शाती है। कुल्लन देवी के मामले में भी अंतिम यात्रा में मौजूद लोगों ने उनके साथ जुड़े अपने अनुभवों और उनके सामाजिक योगदान को याद किया।

‘सिर्फ वाल्मीकि समाज की नेता नहीं, सर्वसमाज की आवाज थीं’

मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कुल्लन देवी के सामाजिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि वे केवल वाल्मीकि समाज की नेता नहीं थीं, बल्कि सर्वसमाज की आवाज थीं।

उनका कहना था कि कुल्लन देवी का संघर्ष किसी एक वर्ग या समुदाय तक सीमित नहीं रहा। वे जरूरतमंद व्यक्ति की समस्या को अपनी समस्या मानकर उसके समाधान के लिए प्रयास करती थीं। इसी वजह से अलग-अलग सामाजिक वर्गों में उनके प्रति सम्मान और आत्मीयता बनी रही।

सामाजिक नेतृत्व का एक महत्वपूर्ण पक्ष लोगों की समस्याओं को सुनना और उन्हें उचित मंच तक पहुंचाना होता है। कुल्लन देवी लंबे समय तक इसी तरह की सामाजिक गतिविधियों से जुड़ी रहीं। उनके समर्थकों और परिचितों के बीच उनकी पहचान एक सक्रिय और संघर्षशील सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में रही।

कमजोर और वंचित लोगों के मुद्दों को उठाती थीं कुल्लन देवी

कुल्लन देवी के बारे में मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि उन्होंने कमजोर, वंचित और जरूरतमंद लोगों के हितों के लिए आवाज उठाई। सामाजिक जीवन में ऐसे मुद्दे अक्सर सामने आते हैं जिनके समाधान के लिए संबंधित लोगों को प्रशासन और जनप्रतिनिधियों तक अपनी बात पहुंचानी पड़ती है।

कुल्लन देवी ने ऐसे मामलों में अपनी सक्रियता बनाए रखी। उन्होंने लोगों के अधिकार और सम्मान से जुड़े विषयों को उठाने में रुचि दिखाई और समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास किए।

उनकी इसी सक्रियता के कारण उन्हें सामाजिक क्षेत्र में एक जुझारू महिला के रूप में पहचान मिली। उनके निधन के बाद उनके साथ काम करने वाले और सामाजिक गतिविधियों से जुड़े लोग उनके योगदान को याद कर रहे हैं।

समाज को जोड़ने और भाईचारे को मजबूत करने पर रहा जोर

मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि कुल्लन देवी ने समाज को जोड़ने का काम किया। उनके अनुसार उन्होंने विभिन्न लोगों के बीच आपसी विश्वास और भाईचारे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

किसी भी शहर और समाज में अलग-अलग वर्गों के बीच संवाद और सहयोग सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। ऐसे में सामाजिक कार्यकर्ताओं की भूमिका केवल किसी एक मुद्दे को उठाने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वे लोगों को एक-दूसरे के करीब लाने में भी भूमिका निभाते हैं।

कुल्लन देवी के सामाजिक जीवन को लेकर मंत्री द्वारा व्यक्त किए गए विचारों में भी यही पक्ष प्रमुखता से सामने आया। उन्होंने कहा कि कुल्लन देवी का संघर्ष किसी विशेष वर्ग तक सीमित नहीं था और वे जरूरतमंद लोगों के लिए समान रूप से आवाज उठाती थीं।

सामाजिक क्षेत्र में एक सक्रिय आवाज का निधन

कुल्लन देवी के निधन से सामाजिक क्षेत्र में एक सक्रिय आवाज का जाना माना जा रहा है। लंबे समय तक सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहने वाले किसी व्यक्ति के निधन का प्रभाव उसके परिवार के साथ-साथ उससे जुड़े सामाजिक समूहों पर भी पड़ता है।

कुल्लन देवी के साथ जुड़े लोगों के लिए उनकी पहचान केवल एक पद या संगठन से नहीं थी। वे अपने संघर्षशील स्वभाव और सामाजिक मुद्दों पर सक्रियता के कारण लोगों के बीच जानी जाती थीं।

उनके निधन पर विभिन्न वर्गों के लोगों की मौजूदगी और अंतिम यात्रा में भागीदारी भी उनके सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यापक संपर्क की तस्वीर सामने लाती है।

मंत्री ने सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों का भी किया उल्लेख

शोक व्यक्त करते हुए मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में सरकार द्वारा समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के सम्मान, अधिकार और कल्याण के लिए किए जा रहे कार्यों का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों तक योजनाओं तथा कल्याणकारी प्रयासों का लाभ पहुंचाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी संदर्भ में उन्होंने सामाजिक क्षेत्र में जीवनभर संघर्ष करने वाले लोगों के योगदान को महत्वपूर्ण बताया।

कुल्लन देवी के सामाजिक जीवन का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि उन्होंने लंबे समय तक समाज के हितों से जुड़े मुद्दों को उठाया और जरूरतमंद लोगों की आवाज बनने का प्रयास किया।

‘कुल्लन देवी किसी एक समाज की नहीं, सर्वसमाज की अपनी थीं’

मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि कुल्लन देवी को केवल किसी एक समुदाय के प्रतिनिधि के रूप में देखना उनके सामाजिक योगदान को सीमित करना होगा। उन्होंने कहा कि वे सर्वसमाज की अपनी थीं और विभिन्न वर्गों के लोगों के साथ उनके आत्मीय संबंध रहे।

यह बात उनके अंतिम संस्कार में शामिल हुए लोगों की विविधता से भी दिखाई दी। अंतिम यात्रा में समाज के अलग-अलग वर्गों से जुड़े नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी रही।

कुल्लन देवी की सामाजिक सक्रियता का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी बताया गया कि वे लोगों की समस्याओं को लेकर अपनी बात रखने से पीछे नहीं हटती थीं। किसी मुद्दे को लेकर संघर्ष करना हो या जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करनी हो, उनकी सक्रिय भूमिका की चर्चा उनके सामाजिक जीवन से जुड़ी रही।

कुल्लन देवी के संघर्ष को याद करते हुए भावुक हुआ सामाजिक क्षेत्र

निधन के बाद सामाजिक क्षेत्र में कुल्लन देवी के जीवन और उनके संघर्ष को लेकर चर्चा होती रही। एक ऐसी महिला के रूप में उनकी पहचान रही जिसने सामाजिक मुद्दों को लेकर अपनी आवाज बुलंद रखी।

उनके निधन से परिवार के साथ-साथ उन लोगों में भी शोक है जो उनके सामाजिक कार्यों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े रहे। अंतिम यात्रा में लोगों की भागीदारी और श्रद्धांजलि देने वालों की संख्या इसी भावनात्मक जुड़ाव की झलक देती है।

उनके निधन के बाद उनके सामाजिक योगदान और लोगों के बीच बनाए गए संबंधों को याद किया जा रहा है। सामाजिक जीवन में लंबे समय तक सक्रिय रहने वाले लोगों की विरासत उनके द्वारा किए गए कार्यों और लोगों के साथ उनके व्यवहार के माध्यम से आगे बढ़ती है।

जनसेवा और सामाजिक समरसता के संदर्भ में याद रहेंगी कुल्लन देवी

कुल्लन देवी के सामाजिक जीवन को लेकर मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि उनका संघर्ष, सेवा और समर्पण हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कुल्लन देवी का जीवन सामाजिक समरसता, जनसेवा और संघर्ष की प्रेरणा देता रहेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि उनके विचार और सामाजिक योगदान आने वाली पीढ़ियों को जनसेवा के लिए प्रेरित करते रहेंगे।

कुल्लन देवी के निधन के बाद उनके परिवार के लिए यह कठिन समय है। उनके सामाजिक परिचितों और शुभचिंतकों की संवेदनाएं शोकाकुल परिवार के साथ हैं। अंतिम यात्रा में मौजूद लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए उनके सामाजिक जीवन को याद किया और उन्हें अंतिम विदाई दी।

मुजफ्फरनगर में सामाजिक जीवन ने दी एक संघर्षशील महिला को अंतिम विदाई

कुल्लन देवी का निधन मुजफ्फरनगर के सामाजिक क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण क्षति के रूप में सामने आया है। वाल्मीकि समाज में उनकी सक्रिय भूमिका के साथ-साथ विभिन्न वर्गों के लोगों के बीच उनकी मौजूदगी ने उन्हें व्यापक सामाजिक पहचान दी।

मंत्री कपिल देव अग्रवाल का उनके निवास पर पहुंचना, परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त करना और अंतिम यात्रा में स्वयं शामिल होकर अर्थी को कंधा देना इस शोक की गंभीरता को दर्शाने वाला प्रमुख घटनाक्रम रहा।

अंतिम यात्रा में शामिल सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों और विभिन्न वर्गों के लोगों ने कुल्लन देवी को अंतिम विदाई दी। उनके सामाजिक जीवन से जुड़े लोगों ने उनके संघर्ष और जनसेवा को याद किया।

कुल्लन देवी ने जिन सामाजिक मुद्दों को लेकर अपनी आवाज उठाई, जरूरतमंद लोगों के लिए जिस तरह सक्रिय रहीं और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद तथा भाईचारे की भावना को मजबूत करने का प्रयास किया, वही उनके सार्वजनिक जीवन की प्रमुख पहचान के रूप में याद किया जा रहा है।

कुल्लन देवी का सामाजिक योगदान आने वाले समय में भी चर्चा में रहेगा

सामाजिक जीवन में किसी व्यक्ति की भूमिका उसके पद से अधिक उसके काम और लोगों के साथ बने संबंधों से पहचानी जाती है। कुल्लन देवी की पहचान भी उनके संघर्ष, सामाजिक सक्रियता और जरूरतमंद लोगों की आवाज उठाने से जुड़ी रही।

उनके निधन के बाद मुजफ्फरनगर में सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने भी उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि वे सर्वसमाज की आवाज थीं।

कुल्लन देवी की अंतिम यात्रा में उमड़ी लोगों की मौजूदगी उनके सामाजिक जीवन से जुड़े व्यापक संपर्क की तस्वीर सामने लेकर आई। शोक के इस अवसर पर उनके परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की गईं और दिवंगत समाजसेवी को सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई दी गई।

कुल्लन देवी को अंतिम विदाई के साथ उनके सामाजिक जीवन और जनसेवा से जुड़े योगदान को याद किया गया। मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने उनके निवास पर पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की, परिजनों से संवेदना व्यक्त की और अंतिम यात्रा में शामिल होकर अर्थी को कंधा दिया। बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न वर्गों के लोगों ने भी अंतिम यात्रा में शामिल होकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उनके सामाजिक संघर्ष, सेवा और जरूरतमंद लोगों के लिए उठाई गई आवाज को उनके सार्वजनिक जीवन की महत्वपूर्ण पहचान के रूप में याद किया जा रहा है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

अभी अभी की खबरें