Muzaffarnagar श्री राम ग्रुप ऑफ कॉलेजेज, इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में इंटरनल हैकाथॉन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के छात्र-छात्राओं ने उत्साह के साथ भाग लेते हुए तकनीकी ज्ञान, रचनात्मक सोच और समस्या-समाधान क्षमता का प्रदर्शन किया। इंटरनल हैकाथॉन का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की समस्याओं को समझने और उनके तकनीकी एवं व्यावहारिक समाधान विकसित करने के लिए एक मंच उपलब्ध कराना रहा।
कार्यक्रम में 44 टीमों के 260 से अधिक छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। विद्यार्थियों ने 40 से अधिक प्रॉब्लम स्टेटमेंट पर काम करते हुए सामाजिक और औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़ी विभिन्न चुनौतियों के समाधान प्रस्तुत किए। प्रोजेक्ट्स के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह दिखाने का प्रयास किया कि तकनीकी शिक्षा केवल कक्षा और पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि वास्तविक समस्याओं को हल करने में भी इसका उपयोग किया जा सकता है।
इंटरनल हैकाथॉन में विद्यार्थियों की भागीदारी ने परिसर में नवाचार, अनुसंधान और तकनीकी प्रयोग के माहौल को भी सामने रखा। अलग-अलग विभागों से आने वाली टीमों ने अपने विचारों को प्रोजेक्ट और तकनीकी समाधान का रूप देकर निर्णायकों और अतिथियों के सामने प्रस्तुत किया।
छात्रों के लिए सिर्फ प्रतियोगिता नहीं, समस्या हल करने का मंच
हैकाथॉन का उद्देश्य केवल एक प्रतियोगिता आयोजित करना नहीं होता। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को किसी समस्या को पहचानने, उसके कारणों को समझने, संभावित समाधान तलाशने और फिर तकनीक के माध्यम से उसका प्रोटोटाइप या समाधान विकसित करने का अवसर देते हैं।
श्री राम ग्रुप ऑफ कॉलेजेज में आयोजित इंटरनल हैकाथॉन में भी इसी सोच को प्रमुखता दी गई। विद्यार्थियों को 40 से अधिक प्रॉब्लम स्टेटमेंट पर काम करने का अवसर मिला। इन समस्याओं का संबंध सामाजिक और औद्योगिक क्षेत्रों से बताया गया।
इस तरह विद्यार्थियों को केवल किताबों में पढ़े गए सिद्धांतों को दोहराने के बजाय उन्हें व्यावहारिक परिस्थितियों में लागू करने का मौका मिला।
44 टीमों में 260 से अधिक विद्यार्थियों की भागीदारी
कार्यक्रम में विभिन्न विभागों की कुल 44 टीमों ने भाग लिया। इन टीमों में 260 से अधिक छात्र-छात्राएं शामिल रहे। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की भागीदारी ने इंटरनल हैकाथॉन को संस्थान के महत्वपूर्ण तकनीकी आयोजनों में शामिल कर दिया।
टीम आधारित काम के दौरान विद्यार्थियों को अपने-अपने कौशल के अनुसार जिम्मेदारियां बांटने का अवसर मिला। किसी ने तकनीकी विकास पर काम किया तो किसी ने समस्या की पहचान, डेटा, डिजाइन, प्रस्तुति या समाधान के दूसरे हिस्सों को संभाला।
इस प्रकार हैकाथॉन में तकनीकी ज्ञान के साथ टीमवर्क भी विद्यार्थियों के सीखने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
40 से अधिक प्रॉब्लम स्टेटमेंट पर तैयार हुए समाधान
इंटरनल हैकाथॉन में विद्यार्थियों ने 40 से अधिक प्रॉब्लम स्टेटमेंट पर काम किया। इन समस्याओं का दायरा सामाजिक और औद्योगिक जरूरतों से जुड़ा बताया गया।
वास्तविक जीवन की समस्याओं को तकनीकी समाधान में बदलना इंजीनियरिंग शिक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। किसी समस्या के लिए केवल तकनीक का इस्तेमाल करना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि समाधान को व्यावहारिक, उपयोगी और लागू किए जाने योग्य बनाने की चुनौती भी होती है।
विद्यार्थियों ने अपने प्रोजेक्ट्स के माध्यम से इसी दिशा में प्रयास किया। उन्होंने उपलब्ध तकनीकी ज्ञान का इस्तेमाल करते हुए अपने-अपने समाधान प्रस्तुत किए।
नवाचार और रचनात्मक सोच पर विशेष जोर
कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों में नवाचार और रचनात्मकता को बढ़ावा देना रहा। संस्थान के अध्यक्ष डॉ. एस.सी. कुलश्रेष्ठ ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्हें नवाचार और शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार की शैक्षणिक गतिविधियां विद्यार्थियों में जिज्ञासा, नवाचार और समस्या-समाधान क्षमता विकसित करने में सहायक होती हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया कि वे तकनीक को केवल परीक्षा या डिग्री प्राप्त करने का माध्यम न मानें, बल्कि नई समस्याओं के समाधान तलाशने के लिए उसका उपयोग करें।
डॉ. एस.सी. कुलश्रेष्ठ ने छात्रों को किया प्रेरित
संस्थान के अध्यक्ष डॉ. एस.सी. कुलश्रेष्ठ ने कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने नवाचार और शोध को उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए विद्यार्थियों को लगातार नए प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया।
उनके अनुसार विद्यार्थियों में सवाल पूछने, नई चीजें सीखने और किसी समस्या को अलग दृष्टिकोण से देखने की क्षमता विकसित करना जरूरी है।
हैकाथॉन जैसे आयोजनों में विद्यार्थी किसी समस्या को लेकर स्वयं समाधान तलाशते हैं। इससे उनमें आत्मविश्वास और स्वतंत्र रूप से काम करने की क्षमता भी विकसित हो सकती है।
मुख्य अतिथि डॉ. निशांत राठी ने देखा छात्रों का तकनीकी काम
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. निशांत राठी, डीन कंप्यूटर एप्लीकेशन, श्री राम ग्रुप ऑफ कॉलेजेज रहे। उन्होंने विद्यार्थियों के विभिन्न प्रोजेक्ट्स और प्रस्तुतियों का अवलोकन किया।
डॉ. निशांत राठी ने छात्रों द्वारा विकसित किए गए विचारों को देखा और उन्हें तकनीकी क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विद्यार्थियों से उनके प्रोजेक्ट्स के बारे में जानकारी भी ली।
प्रोजेक्ट प्रस्तुति के दौरान छात्रों को अपने विचारों को स्पष्ट रूप से समझाने का अवसर मिला। किसी भी तकनीकी समाधान के लिए केवल उसका निर्माण ही नहीं, बल्कि उसकी उपयोगिता और काम करने की प्रक्रिया को समझा पाना भी महत्वपूर्ण होता है।
डॉ. अश्विनी वशिष्ठ ने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की
श्री राम ग्रुप ऑफ कॉलेजेज की निदेशक डॉ. अश्विनी वशिष्ठ ने भी कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने छात्रों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन वास्तविक समस्याओं को समझने और उनके समाधान विकसित करने का महत्वपूर्ण अवसर देता है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपने तकनीकी ज्ञान को व्यवहारिक रूप में बदलने के लिए ऐसे मंचों का उपयोग करना चाहिए।
हैकाथॉन में भाग लेने वाले विद्यार्थियों को किसी समस्या पर शुरुआत से काम करने का अवसर मिलता है। इससे उन्हें समस्या की पहचान, समाधान की योजना, तकनीकी विकास और प्रस्तुति जैसे विभिन्न चरणों को समझने में मदद मिलती है।
तकनीकी ज्ञान को व्यवहारिक समाधान में बदलने की चुनौती
किसी इंजीनियरिंग विद्यार्थी के लिए किताब में पढ़े गए सिद्धांत को वास्तविक समस्या पर लागू करना अलग तरह का अनुभव होता है। वास्तविक परिस्थितियों में संसाधन, समय, लागत, तकनीकी सीमाएं और उपयोगकर्ता की जरूरत जैसे कई पहलू सामने आते हैं।
हैकाथॉन विद्यार्थियों को इसी वास्तविकता से परिचित कराने का माध्यम बन सकता है। श्री राम ग्रुप ऑफ कॉलेजेज में आयोजित कार्यक्रम में भी छात्रों को प्रॉब्लम स्टेटमेंट के आधार पर समाधान तैयार करने का अवसर मिला।
इस प्रक्रिया में विद्यार्थियों ने अपने तकनीकी ज्ञान के साथ रचनात्मकता और टीमवर्क का भी उपयोग किया।
इंजीनियरिंग के विभिन्न विभागों की रही भागीदारी
कार्यक्रम में इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा से जुड़े विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में संस्थान के वरिष्ठ पदाधिकारी और विभागाध्यक्ष भी मौजूद रहे।
डॉ. सुचित्रा त्यागी, डीन, श्री राम ग्रुप ऑफ कॉलेजेज, इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी तथा डॉ. अंकुर धीमान, रजिस्ट्रार, कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
इसके अलावा मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष इं. पवन कुमार, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष इं. आशीष चौहान, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष इं. कनुप्रिया तथा सिविल इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष इं. फिरोज अली भी मौजूद रहे।
विभिन्न विभागों के शिक्षकों और विभागाध्यक्षों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को बहुविषयक स्वरूप दिया।
मैकेनिकल से लेकर एआई तक, तकनीकी क्षेत्रों का संगम
हैकाथॉन जैसे आयोजनों की खासियत यह होती है कि किसी समस्या का समाधान केवल एक विषय के ज्ञान से नहीं निकलता। कई बार मैकेनिकल इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सिविल इंजीनियरिंग जैसे अलग-अलग क्षेत्रों की तकनीकों को एक साथ इस्तेमाल करना पड़ता है।
श्री राम ग्रुप ऑफ कॉलेजेज में विभिन्न तकनीकी विभागों की मौजूदगी से विद्यार्थियों को इसी तरह की बहुविषयक सोच विकसित करने का अवसर मिला।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, ऑटोमेशन, सेंसर आधारित तकनीक और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसी तकनीकें आज विभिन्न क्षेत्रों की समस्याओं के समाधान में इस्तेमाल की जा रही हैं। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को इन तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग के बारे में सोचने का अवसर देते हैं।
टीमवर्क को भी मिला बड़ा मंच
हैकाथॉन में टीम आधारित काम विद्यार्थियों के लिए एक अलग सीखने का अनुभव होता है। एक टीम में अलग-अलग कौशल वाले छात्र साथ काम करते हैं और उन्हें समय सीमा के भीतर समाधान तैयार करना होता है।
इस दौरान आपसी संवाद, जिम्मेदारियों का विभाजन, तकनीकी मतभेदों का समाधान और अंतिम प्रस्तुति जैसी क्षमताओं का विकास होता है।
कार्यक्रम में शामिल 44 टीमों ने अपने-अपने प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए। इससे विद्यार्थियों को टीम के रूप में अपने विचार को अंतिम रूप देने और उसे निर्णायकों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिला।
राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभा दिखाने की तैयारी
इंटरनल हैकाथॉन को विद्यार्थियों के लिए आगे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने की तैयारी के रूप में भी देखा गया। संस्थान की ओर से बताया गया कि कार्यक्रम के माध्यम से छात्रों को नवाचार और समस्या-समाधान की दिशा में आगे बढ़ने तथा राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए प्रेरित किया गया।
फाइनल राउंड के लिए चयनित विद्यार्थियों को संस्थान के प्रबंधन और शिक्षकों ने शुभकामनाएं दीं।
इससे विद्यार्थियों के लिए इंटरनल स्तर से आगे बढ़कर बड़े मंच पर अपने समाधान को प्रस्तुत करने की संभावना बनती है।
शोध और नवाचार को जोड़ने की कोशिश
कार्यक्रम में केवल प्रोजेक्ट बनाने पर ध्यान नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों को अनुसंधान और तकनीकी विकास के क्षेत्र में भी आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
शोध आधारित सोच का अर्थ किसी समस्या को केवल सतही तौर पर समझना नहीं, बल्कि उसके कारण, उपलब्ध समाधान और नई संभावनाओं का अध्ययन करना है।
हैकाथॉन में विद्यार्थियों को कम समय में समाधान विकसित करने की चुनौती मिलती है, जबकि अनुसंधान उन्हें किसी समस्या को अधिक गहराई से समझने का अवसर देता है। दोनों के बीच संतुलन तकनीकी शिक्षा में उपयोगी हो सकता है।
एसपीओसी-एसआईएच-2026 की महत्वपूर्ण भूमिका
कार्यक्रम के सफल आयोजन में एसपीओसी-एसआईएच-2026 इं. अंकुर कौशिक, विभागाध्यक्ष एआई एंड एमएल एवं डी.एस. का विशेष योगदान रहा।
उनके साथ फैकल्टी कोऑर्डिनेटर इं. वैभव सिंह चौहान और इं. सचिन संगल ने भी आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इंटरनल हैकाथॉन जैसे कार्यक्रमों के संचालन में छात्रों के पंजीकरण, टीम गठन, प्रॉब्लम स्टेटमेंट, मेंटरिंग, मूल्यांकन और प्रस्तुतियों के समन्वय जैसी कई गतिविधियां शामिल होती हैं। ऐसे आयोजन में फैकल्टी और आयोजक टीम का समन्वय महत्वपूर्ण होता है।
विद्यार्थियों ने दिखाया तकनीकी कौशल और रचनात्मकता का मेल
कार्यक्रम में प्रस्तुत प्रोजेक्ट्स के माध्यम से विद्यार्थियों ने तकनीकी दक्षता के साथ रचनात्मक सोच का प्रदर्शन किया। किसी भी नवाचार की सफलता केवल तकनीक पर निर्भर नहीं करती; समस्या की सही पहचान और उपयोगकर्ता की वास्तविक जरूरत को समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
हैकाथॉन में विद्यार्थियों को अपने समाधान को इस दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने का अवसर मिला।
उनके प्रोजेक्ट्स में टीमवर्क, तकनीकी ज्ञान और समस्या-समाधान क्षमता के साथ अपने विचार को प्रस्तुत करने का कौशल भी दिखाई दिया।
सामाजिक समस्याओं के समाधान में तकनीक का इस्तेमाल
हैकाथॉन में सामाजिक क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं पर भी काम किया गया। आज तकनीक का उपयोग स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा, परिवहन, पर्यावरण, कृषि और सार्वजनिक सेवाओं सहित अनेक क्षेत्रों में किया जा सकता है।
विद्यार्थियों को जब वास्तविक सामाजिक समस्या पर काम करने का अवसर मिलता है, तो उनके तकनीकी ज्ञान का उद्देश्य भी अधिक स्पष्ट हो सकता है।
ऐसे प्रोजेक्ट भविष्य में स्टार्टअप या सामाजिक उद्यम के रूप में भी विकसित हो सकते हैं, हालांकि किसी विचार को व्यावसायिक रूप देने के लिए बाजार, लागत, तकनीकी व्यवहार्यता और उपयोगकर्ता की जरूरत का अलग से मूल्यांकन आवश्यक होता है।
औद्योगिक समस्याओं पर भी छात्रों की नजर
40 से अधिक प्रॉब्लम स्टेटमेंट में औद्योगिक क्षेत्र से जुड़ी समस्याएं भी शामिल रहीं। इससे विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि उद्योगों में तकनीकी चुनौतियां किस प्रकार की होती हैं।
औद्योगिक क्षेत्र में ऑटोमेशन, ऊर्जा दक्षता, उत्पादन प्रक्रिया, गुणवत्ता नियंत्रण, डेटा विश्लेषण, मशीन मॉनिटरिंग और सुरक्षा जैसे विषय तकनीकी समाधान की मांग करते हैं।
इंजीनियरिंग विद्यार्थियों के लिए ऐसे विषयों पर काम करना उन्हें उद्योग की वास्तविक जरूरतों से परिचित कराने में मदद कर सकता है।
डॉ. सुचित्रा त्यागी और डॉ. अंकुर धीमान की मौजूदगी
कार्यक्रम में डॉ. सुचित्रा त्यागी, डीन, श्री राम ग्रुप ऑफ कॉलेजेज, इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी तथा डॉ. अंकुर धीमान, रजिस्ट्रार मौजूद रहे।
उन्होंने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया और नवाचार, अनुसंधान तथा तकनीकी विकास के क्षेत्र में निरंतर प्रयास करने के लिए प्रेरित किया।
संस्थान स्तर पर ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन से विद्यार्थियों को नियमित शैक्षणिक गतिविधियों से अलग व्यावहारिक अनुभव भी मिलता है।
विभागाध्यक्षों ने छात्रों का बढ़ाया उत्साह
कार्यक्रम में मैकेनिकल इंजीनियरिंग के विभागाध्यक्ष इं. पवन कुमार, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग के विभागाध्यक्ष इं. आशीष चौहान, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग की विभागाध्यक्ष इं. कनुप्रिया और सिविल इंजीनियरिंग के विभागाध्यक्ष इं. फिरोज अली उपस्थित रहे।
विभागाध्यक्षों ने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की और उन्हें तकनीकी शिक्षा के साथ नवाचार और अनुसंधान में भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
अलग-अलग विभागों के प्रमुखों की मौजूदगी ने विद्यार्थियों को अपने प्रोजेक्ट्स पर विशेषज्ञों से प्रतिक्रिया लेने का अवसर भी दिया।
हैकाथॉन से छात्रों में आत्मविश्वास बढ़ाने का अवसर
जब विद्यार्थी अपने बनाए प्रोजेक्ट को विशेषज्ञों और शिक्षकों के सामने प्रस्तुत करते हैं, तो उन्हें अपने विचार को स्पष्ट भाषा में समझाने का अभ्यास मिलता है।
कई बार तकनीकी रूप से अच्छा समाधान होने के बावजूद यदि उसे स्पष्ट रूप से प्रस्तुत नहीं किया जाए तो उसकी उपयोगिता सामने नहीं आ पाती। इसलिए प्रोजेक्ट प्रस्तुति भी हैकाथॉन का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है।
श्री राम ग्रुप ऑफ कॉलेजेज में आयोजित कार्यक्रम में छात्रों को इसी प्रकार अपने विचार और समाधान प्रस्तुत करने का अवसर मिला।
नई पीढ़ी के इंजीनियरों के लिए बदलता तकनीकी वातावरण
तकनीकी शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, रोबोटिक्स, ऑटोमेशन और डेटा आधारित तकनीकें उद्योगों में नई संभावनाएं पैदा कर रही हैं।
ऐसे समय में विद्यार्थियों के लिए केवल पाठ्यक्रम पूरा करना पर्याप्त नहीं माना जाता। उन्हें नई तकनीकों को समझने और वास्तविक समस्याओं में उनका इस्तेमाल करने का अनुभव भी जरूरी है।
हैकाथॉन इस दिशा में एक व्यावहारिक मंच उपलब्ध करा सकता है।
छात्रों के विचारों को प्रोजेक्ट में बदलने का अवसर
कई बार विद्यार्थियों के पास समस्या का समाधान करने का विचार होता है, लेकिन उसे प्रोजेक्ट के रूप में विकसित करने का अवसर नहीं मिलता। हैकाथॉन ऐसे विचारों को एक निश्चित समय सीमा और टीम के साथ काम करने का अवसर देता है।
44 टीमों ने अपने-अपने प्रॉब्लम स्टेटमेंट पर काम करते हुए इसी प्रक्रिया का अनुभव किया।
विचार से प्रोटोटाइप और फिर प्रस्तुति तक का सफर विद्यार्थियों के लिए तकनीकी और व्यक्तिगत दोनों स्तरों पर सीखने वाला अनुभव हो सकता है।
फाइनल राउंड के लिए चयनित छात्रों को शुभकामनाएं
कार्यक्रम के अंत में संस्थान के प्रबंधन और शिक्षकों ने फाइनल राउंड के लिए चयनित छात्रों को शुभकामनाएं दीं। चयनित विद्यार्थियों से आगे भी इसी उत्साह के साथ काम जारी रखने और अपने समाधान को और बेहतर बनाने की अपेक्षा की गई।
फाइनल राउंड में पहुंचना विद्यार्थियों के लिए अपने प्रोजेक्ट को अधिक व्यापक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर होगा।
संस्थान की ओर से छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें नवाचार और शोध की दिशा में लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
मुजफ्फरनगर में तकनीकी शिक्षा को मिला इनोवेशन का मंच
श्री राम ग्रुप ऑफ कॉलेजेज में आयोजित इंटरनल हैकाथॉन ने मुजफ्फरनगर में तकनीकी शिक्षा और छात्र नवाचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण गतिविधि को सामने रखा। 260 से अधिक छात्रों और 44 टीमों की भागीदारी से यह स्पष्ट हुआ कि विद्यार्थियों में तकनीकी समस्याओं पर काम करने और नए समाधान विकसित करने को लेकर रुचि है।
40 से अधिक प्रॉब्लम स्टेटमेंट पर काम करने के दौरान विद्यार्थियों ने सामाजिक और औद्योगिक समस्याओं को तकनीकी दृष्टिकोण से देखने का प्रयास किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल विजेता चुनना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में ऐसी सोच विकसित करना रहा जिसमें वे समस्या को पहचानें, उसका विश्लेषण करें और तकनीक की मदद से समाधान तैयार करें।
हैकाथॉन से आगे स्टार्टअप और रिसर्च की राह
यदि किसी छात्र का हैकाथॉन में प्रस्तुत विचार तकनीकी और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य साबित होता है, तो भविष्य में उसे प्रोटोटाइप, पेटेंट, रिसर्च प्रोजेक्ट या स्टार्टअप की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है।
हालांकि इसके लिए हैकाथॉन के बाद भी लगातार काम, परीक्षण, बाजार अध्ययन और तकनीकी सुधार की जरूरत होती है।
इस लिहाज से ऐसे आयोजन विद्यार्थियों के लिए शुरुआती मंच का काम कर सकते हैं, जहां से कोई विचार आगे की लंबी यात्रा शुरू कर सकता है।
युवाओं के लिए संदेश—सिर्फ तकनीक सीखें नहीं, उसका इस्तेमाल भी करें
कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों और अतिथियों के संबोधनों में एक साझा संदेश दिखाई दिया—तकनीकी ज्ञान को वास्तविक समस्याओं के समाधान से जोड़ना जरूरी है।
आज के विद्यार्थियों के सामने तकनीकी संसाधनों की कमी पहले की तुलना में कम है, लेकिन सही समस्या की पहचान और उसका व्यावहारिक समाधान विकसित करना अब भी चुनौतीपूर्ण है।
इसीलिए हैकाथॉन जैसे आयोजनों में छात्रों को वास्तविक परिस्थितियों के करीब लाने का प्रयास किया जाता है।
समापन की ओर बढ़ा आयोजन, छात्रों में दिखा उत्साह
दिनभर चले कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने अपने प्रोजेक्ट्स प्रस्तुत किए और विशेषज्ञों एवं शिक्षकों के सामने अपने विचारों को समझाया। शिक्षकों ने छात्रों का मार्गदर्शन किया और उन्हें तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
आयोजन के अंत में फाइनल राउंड के लिए चयनित छात्रों को शुभकामनाएं दी गईं।
श्री राम ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के प्रबंधन और शिक्षकों ने उम्मीद जताई कि विद्यार्थी आगे भी नवाचार, अनुसंधान और तकनीकी विकास के क्षेत्र में निरंतर प्रयास करते रहेंगे।
श्री राम ग्रुप ऑफ कॉलेजेज में आयोजित इंटरनल हैकाथॉन ने विद्यार्थियों को कक्षा की पढ़ाई से आगे बढ़कर वास्तविक सामाजिक और औद्योगिक समस्याओं पर काम करने का अवसर दिया। 44 टीमों के 260 से अधिक छात्र-छात्राओं ने 40 से अधिक प्रॉब्लम स्टेटमेंट पर अपने तकनीकी और रचनात्मक समाधान प्रस्तुत किए। संस्थान के अध्यक्ष डॉ. एस.सी. कुलश्रेष्ठ, निदेशक डॉ. अश्विनी वशिष्ठ, मुख्य अतिथि डॉ. निशांत राठी, डीन डॉ. सुचित्रा त्यागी, रजिस्ट्रार डॉ. अंकुर धीमान तथा विभिन्न विभागाध्यक्षों ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। फाइनल राउंड के लिए चयनित छात्रों को शुभकामनाएं देते हुए संस्थान ने उन्हें नवाचार, अनुसंधान और तकनीकी विकास की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
