अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की घटना के बाद चंपत राय ने रामनगरी के साधु-संतों से संपर्क बढ़ाना शुरू कर दिया है। वह अलग-अलग समाज और जातीय समूहों से जुड़े मंदिरों में पहुंचकर संतों से मुलाकात कर रहे हैं। इस पहल को धार्मिक संवाद के साथ-साथ संत समाज के बीच विश्वास और समन्वय मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
राम मंदिर आंदोलन से जुड़े प्रमुख चेहरों में शामिल रहे चंपत राय की संतों से यह मुलाकात ऐसे समय पर हो रही है, जब मंदिर व्यवस्था और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर कुछ सवाल उठे हैं। वे स्वयं एसआईटी की जांच का सामना कर रहे हैं। माना जा रहा है कि संतों से सीधा संवाद करके ट्रस्ट यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि राम मंदिर केवल एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे संत समाज और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।
संत समाज को साथ लेकर चलने की पहल
अयोध्या की धार्मिक और सामाजिक संरचना में साधु-संतों की भूमिका हमेशा प्रभावशाली रही है। संतों की बात समाज के बड़े वर्ग तक पहुंचती है। ऐसे में चंपत राय का विभिन्न परंपराओं और समाजों के मंदिरों में जाना संत समाज को साथ लेकर चलने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। वे अब तक जायसवाल मंदिर, धोबी मंदिर, कबीर मंदिर सहित विभिन्न परंपरा के मंदिरों में जाकर संतों से मुलाकात कर चुके हैं।
संतों के बीच भरोसा कायम रखना ट्रस्ट के लिए अहम
यह संपर्क अभियान इस बात का संकेत भी माना जा रहा है कि ट्रस्ट मंदिर से जुड़े विषयों पर संतों की राय और सहभागिता को महत्व दे रहा है। चढ़ावा व्यवस्था को लेकर उठे विवाद के बाद संतों के बीच भरोसा कायम रखना ट्रस्ट के लिए अहम माना जा रहा है।
संघ से जुड़े महंत जयराम दास कहते हैं कि राजनीतिक और धार्मिक दोनों दृष्टियों से अयोध्या में संत समाज की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में चंपत राय का संत संपर्क अभियान आने वाले समय में राम मंदिर व्यवस्था को लेकर संतों और श्रद्धालुओं के बीच धारणा निर्माण में अहम भूमिका निभा सकता है।
