आगामी चुनावों को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि सत्ताधारी गठबंधन के किसी भी असंतुष्ट नेता या मंत्री को सपा में शामिल नहीं किया जाएगा। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि सत्ता विरोधी रुझान झेल रहे नेताओं को साथ लेने से जनता के बीच गलत संदेश जाएगा और पार्टी को फायदा मिलने के बजाय नुकसान उठाना पड़ सकता है।
वरिष्ठ नेता चुनाव से पहले पाला बदलने की जुगत में
सपा सूत्रों के अनुसार, वर्तमान सरकार में शामिल कुछ मंत्री और सत्ताधारी गठबंधन के वरिष्ठ नेता चुनाव से पहले पाला बदलने की जुगत में हैं। पार्टी नेतृत्व ने अपने रुख को पूरी तरह साफ करते हुए किसी भी ऐसे नेता की एंट्री पर रोक लगा दी है। सपा के रणनीतिकारों का कहना है कि जिन नेताओं के खिलाफ जनता में असंतोष या गुस्सा है, उन्हें शामिल करने से पार्टी को फायदा होने उम्मीद नजर नहीं आती।
पार्टी के इस रणनीतिक बदलाव के पीछे पिछले विधानसभा चुनाव का कड़वा अनुभव है। वर्ष 2022 के चुनाव से ठीक पहले भाजपा सरकार के तत्कालीन कैबिनेट मंत्री रहे स्वामी प्रसाद मौर्य और दारा सिंह चौहान जैसे दिग्गज नेता सपा में शामिल हुए थे। पार्टी को उम्मीद थी कि इससे बड़ा जनाधार उसके पक्ष में आएगा, लेकिन चुनावी नतीजों में इसका अपेक्षित फायदा सपा को नहीं मिला। इसी सबक को ध्यान में रखते हुए सपा नेतृत्व ने अब ऐसे नेताओं से दूरी बनाने का फैसला किया है। इसकी एक वजह यह भी है कि बाहरी नेताओं के आने से पार्टी के पुराने नेता व कार्यकर्ता असहज हो जाते हैं।
