आषाढ़ माह के अंतिम बुधवार को कुएं वाले बाबा के मंदिर में आस्था का सैलाब उमड़ा। सुबह से ही मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। बड़ी संख्या में लोगों ने बाबा के दर्शन किए और विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।

पुजारी प्रभात किशोर ने बताया कि मान्यता है कि आषाढ़ माह के अंतिम बुधवार को बूढ़ी माता, मसानी माता और कुएं वाले बाबा की आखिरी पूजा होती है। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं और बाबा का आशीर्वाद लेते हैं। विशेष पूजा के बाद मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन कुएं से जल निकालकर उसे श्रद्धालुओं पर छिड़का गया। मान्यता है कि इससे चेचक सहित मौसम के अन्य संक्रमण से बचाव होता है।

चली आ रही परंपरा

दयालबाग निवासी कृष्णा राजोरा का कहना है कि सोमवार को सिर्फ पूजा करने आते हैं और बुधवार को बच्चे का मुंडन कराने आते हैं। हमारे घर में यह परंपरा चली आ रही है। कुएं वाले बाबा के मंदिर में आकर परिवार के बच्चों को मुंडन होता है। – , 

चढ़ाते हैं भेंट

नुुनिहाई निवासी अमित ने बताया कि आषाढ़ के आखिरी बुधवार को परिवार के लोग कुएं वाले बाबा के मंदिर पूजन के लिए आते हैं। मान्यता पूरी होने पर भेंट चढ़ाते हैं।



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