लंबे समय से मेडिकल फर्म बंद है तो लाइसेंस निलंबित होगा। दवा कारोबारियों को भी ऐसे फर्म की जानकारी विभाग को देनी होगी। प्रतिष्ठान पर फर्म और संचालक का नाम, जीएसटी, लाइसेंस नंबर और संचालक का फोन नंबर समेत अन्य जानकारी भी दर्ज करनी होंगी। ऐसा नहीं करने पर कार्रवाई होगी। बृहस्पतिवार को सर्किट हाउस में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने दवा कारोबारियों के साथ बैठक कर ये निर्देश दिए।

आयुक्त ने कहा कि लखनऊ की विशेष टीम ने फव्वारा में बंद फर्म और अवैध गोदाम में नकली, सैन्य, ईएसआई अस्पताल और सैंपल की दवाओं की तस्करी पकड़ी है। ऐसे में सभी के थोक लाइसेंस की जांच की जा रही है। लंबे समय से बंद फर्म पड़ी हैं। ऐसी किसी फर्म की जानकारी होने पर दवा कारोबारी विभाग में भी सूचना दें। उन्होंने कहा कि फर्म जिसके नाम से है, वहीं संचालित करे। निरीक्षण में कोई अन्य संचालित करता पाया गया तो कार्रवाई होगी। आगरा फार्मा एसोसिएशन के अध्यक्ष अनूप बंसल और आगरा महानगर केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष आशीष शर्मा ने कहा कि विभाग की इस पहल में पूर्ण सहयोग करेंगे। बैठक में लखनऊ मुख्यालय के सहायक आयुक्त औषधि डीके तिवारी, ड्रग इंस्पेक्टर नवनीत कुमार यादव, निलेश शर्मा, जगदीश राठी, चंद्रकांत गुप्ता, संदीप गुप्ता, प्रवीण गुप्ता आदि मौजूद रहे।

बंद फर्म के संचालक खुद करें लाइसेंस सरेंडर

 सहायक आयुक्त औषधि अतुल उपाध्याय ने बताया कि जिले में दवा के करीब 3100 थोक लाइसेंस हैं। इनकी जांच की जा रही है। लंबे समय से फर्म बंद है या फिर कभी-कभी सिर्फ बिलिंग के लिए फर्म खोली जा रही है। ऐसे संचालक फर्म को नियमित खोलें। ऐसा नहीं कर रहे हैं तो वे फर्म का लाइसेंस सरेंडर कर दें।

किरायानामा नहीं बनाया तो मकान मालिक जिम्मेदार

सहायक आयुक्त औषधि अखिलेश जैन ने बताया कि मेडिकल स्टोर-गोदाम को किराए पर दे रहे हैं तो भवन स्वामी किराएदार से रजिस्टर्ड किरायानामा कराए। गोदाम-फर्म का लाइसेंस की कॉफी भी जमा करे। नियमों का उल्लंघन होने और छापे में अवैध कारोबार साबित होता है तो इसमें भवन स्वामी की भी जिम्मेदारी होगी।

 



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