स्तन में गांठ या फिर आकार बदलना ही स्तन कैंसर का एकमात्र लक्षण नहीं है। चलने-फिरने में समस्या या फिर शरीर का संतुलन बिगड़ने जैसी न्यूरोलॉजिकल समस्याएं भी स्तन कैंसर के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय, केजीएमयू, एम्स रायबरेली, एरा और टीएस मिश्रा मेडिकल कॉलेज के साझा अध्ययन में यह बात सामने आई है। इसे एनल्स ऑफ इंडियन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी जर्नल के ताजा अंक में स्थान मिला है।
केजीएमयू में न्यूरोलॉजी विभाग के पूर्व एवं एरा मेडिकल कॉलेज में न्यूरोलॉजी के वर्तमान विभागाध्यक्ष प्रो. आरके गर्ग ने इस अध्ययन की अगुवाई की। इसमें दुनिया भर में प्रकाशित 172 मरीजों के मामलों और 275 मरीजों वाले 17 कोहोर्ट अध्ययनों का विश्लेषण किया गया।
शोधकर्ताओं ने पाया कि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली कैंसर कोशिकाओं और तंत्रिका तंत्र में मौजूद समान प्रोटीनों पर एक साथ हमला कर देती है। इस वजह से शरीर में इनके खिलाफ प्रतिरक्षा प्रणाली विकसित हो जाती है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि यदि किसी महिला में बिना स्पष्ट कारण के अचानक संतुलन बिगड़ना, पार्किंसन जैसे लक्षण, शरीर में अकड़न या आंखों की असामान्य गतिविधियां विकसित हों तो चिकित्सकों को स्तन कैंसर की आशंका भी ध्यान में रखनी चाहिए। ऐसे मामलों में समय पर जांच से कैंसर का जल्द पता लगाया जा सकता है। इससे इलाज के बेहतर अवसर मिल सकते हैं।
