जमीन कारोबारी संजय वर्मा पर दिन दहाड़े हुई फायरिंग और उनके अंगरक्षक की हत्या के चर्चित मामले में शनिवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनुभव द्विवेदी (आवश्यक वस्तु अधिनियम) की कोर्ट ने सभी आठ सिद्ध दोष अपराधियों को हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इन सभी पर 1.70 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया। अन्य धाराओं में भी सभी दोषी ठहराए गए। सजा सुनाए जाने के बाद पीड़ित पक्ष ने इसे लंबी लड़ाई की जीत का नतीजा बताया है।

न्यायालय के आदेश के अनुसार सोनू गेड़ा उर्फ सचिन गुप्ता, रिंकू गेड़ा उर्फ मनीष गुप्ता, बॉबी गेड़ा उर्फ संदीप गुप्ता, प्रहलाद, राजेंद्र गुर्जर, भूपेंद्र सिंह उर्फ पुष्पेंद्र गुर्जर, कमलेश यादव और उधम सिंह गुर्जर को आईपीसी की धारा 302 के साथ सपठित 149 के तहत दोष सिद्ध करार देते हुए आजीवन कारावास और एक-एक लाख रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया। अर्थदंड अदा नहीं करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इस मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने शुक्रवार को ही इन सभी को दोषी करार दिया था, जबकि इस मामले में सरदार सिंह गुर्जर, राव राजा, भरत सिंह, सनम डागर, गौरव उर्फ मोंटी, सागर राणा, नीतेश पटवारी और रोहित उर्फ रोहताश के खिलाफ साक्ष्य न मिलने पर इनको बरी कर दिया गया था। हमले में घायल संजय वर्मा ने सजा सुनाए जाने के बाद इस पर संतोष जाहिर करते हुए इसे न्याय की जीत बताया।

इन धाराओं में सुनाई सजा…

धारा 302 (हत्या): सभी सिद्ध दोषियों को आजीवन कारावास समेत एक-एक लाख रुपये का जुर्माना

धारा 307 (हत्या के प्रयास) : सभी सिद्ध दोषियों को दस साल के सश्रम कारावास समेत प्रत्येक को 50 हजार का अर्थदंड

धारा 148 (घातक हथियारों से लैस होकर दंगा करना): सभी सिद्धदोष को तीन साल की सजा एवं दस-दस हजार का अर्थदंड

धारा 506 (आपराधिक धमकी): पांच साल सश्रम कारावास समेत दस-दस हजार रुपये का अर्थदंड

सुरक्षा के रहे चाक चौबंद इंतजाम

चर्चित मामले में सजा सुनाए जाने को देखते हुए शनिवार को भी कोर्ट परिसर पुलिस छावनी में तब्दील रहा। कोर्ट के मुख्य दरवाजे से लेकर प्रवेश द्वार के बीच पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी। बाहरी व्यक्तियों को प्रवेश नहीं दिया जा रहा था। सभी आठ आरोपियों के परिजन भी बड़ी संख्या में कोर्ट जा पहुंचे थे। कुछ आरोपियों के परिजन तो कोर्ट के बाहर तक पहुंचने में कामयाब रहे लेकिन, कई आरोपियों के परिजनों को पुलिस ने अधिक संख्या में देखकर बाहर ही रोक दिया। परिजन बाहर ही कई घंटे तक डटे रहे।



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