Blacklisted Firm’s Relatives Awarded ₹5.5 Crore Tenders, Alleged Scam Under Probe

अनाज की कालाबाजारी

विस्तार

 खाद्य एवं रसद विभाग की विपणन शाखा में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। अनाज की कालाबाजारी के गंभीर मामलों में लिप्त और पुलिस जांच के घेरे में आ चुकी ब्लैक लिस्टेड फर्म के सरगना ने नियमों को ताक पर रखकर अपने चहेतों और रिश्तेदारों के नाम पर कई डमी फर्मों का सिंडिकेट खड़ा कर दिया। विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत से इन बेनामी फर्मों के जरिये 5.50 करोड़ रुपये के खाद्यान्न परिवहन और हैंडलिंग के टेंडर हासिल कर लिए गए।


मैनपुरी के रहने वाले मुख्य आरोपी जितेंद्र कुमार गुप्ता की फर्म को पूर्व में खाद्यान्न की बड़े पैमाने पर कालाबाजारी और आवश्यक वस्तु अधिनियम (एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट) के तहत थाना करहल में दर्ज आपराधिक मुकदमे के बाद काली सूची (ब्लैक लिस्ट) में डाला गया था। इसके बावजूद, विभागीय नियमों और शासनादेश संख्या 380/29-6-2024 के प्रस्तर 8.3 व 8.4 को दरकिनार करते हुए, जितेंद्र ने अपने चाचा-ताऊ के बच्चों के नाम बनी फर्मों के नाम पर टेंडर स्वीकृत करा लिए।

खास बात यह है कि इन सभी निविदादाता फर्मों जैसे मैसर्स जय महाकाल, नितिन गुप्ता, धीरेश कुमार गुप्ता और अंकुर इंटरप्राइजेज का पत्राचार और स्थायी पता विभागीय अभिलेखों में महावीर पुरम/राठी मिल, खरगजीत नगर, मैनपुरी ही दर्ज पाया गया है। मिलीभगत करने वाले सरकारी कर्मियों ने एक ही पते और मोबाइल नंबरों को नजरअंदाज कर दिया। यही नहीं, समन्वय बैठकों के दौरान भी ब्लैकलिस्टेड ठेकेदार को शामिल होने दिया और इन फर्मों के लिए टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने दिया गया। इस गंभीर धांधली को लेकर अब विभागीय स्तर पर खलबली मची हुई है।

अफसर बोले कर रहे जांच

संभागीय खाद्य विपणन अधिकारी सत्यपाल सिंह तोमर ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। प्रकरण की गहनता से जांच कराई जा रही है। ठेका हासिल करने वाली संबंधित फर्मों के संचालकों से जवाब-तलब किया गया है। उनके स्पष्टीकरण के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

 



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *