उत्तर प्रदेश में फर्जी ट्रेडिंग के जरिये नकली दवाओं का अंतरराज्यीय नेटवर्क कार्य कर रहा है। बिना दवा की आपूर्ति किए छोटे व्यापारियों के लाइसेंस नंबर पर फर्जी बिलिंग की जा रही है। इसमें दवाओं के बजाय सिर्फ बिल और रुपये का लेनदेन हो रहा है।

राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल में बनने वाली नकली दवाएं यूपी के बाजार में खप रही हैं। इतना ही नहीं यहां के बाजार के रास्ते दूसरे राज्यों में भी भेजी जा रही हैं। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग (एफएसडीए) लगातार छापेमारी कर रहा है। जांच के दौरान मिल रहे सुराग के आधार पर विभिन्न मेडिकल स्टोर संचालकों को दबोचा गया। 

पकड़े गए लोगों से पूछताछ में अब नया खुलासा हुआ है। जांच में यह बात सामने आई कि थोक फर्में आपस में क्राॅस बिलिंग करती है। फर्जी बिल बनाकर नकली दवाओं को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचा रही हैं। बैंक खाते में वास्तविक फंड ट्रांसफर नहीं किया जाता है।

बड़े कारोबारी नामचीन कंपनियों की बिलिंग कराते हैं

बड़े कारोबारी उन लाइसेंसधारियों को निशाना बनाते हैं, जिनका कारोबार कमजोर है। बड़े कारोबारी नामचीन कंपनियों की बिलिंग कराते हैं। छोटे व्यापारियों को रुपये देते हैं। दवा खरीद बिल के आधार पर छोटे व्यापारी इन्हीं रुपये को वापस करते हैं। छोटे व्यापारी को सिर्फ 10 से 15 हजार रुपये प्रति माह थमा दिया जाता है। ये रुपये सिर्फ बिलिंग के होते हैं। 

इस बिल के आधार पर नकली दवाएं दूसरे राज्यों को भेजी जा रही हैं। इसी आरोप में शनिवार को अमीनाबाद व अन्य स्थानों पर स्थित 13 फर्मों की जांच की गई तो इस तरह के नेटवर्क का खुलासा हुआ है। अब इन फर्मों द्वारा की गई बिलिंग व लेजर्स की जांच होने तक दुकानें सील कर दी गई हैं। जांच में आए कारोबारियों के लाइसेंस रद्द करने की तैयारी है।

मार्ग सॉफ्टवेयर में भी लगा दी सेंध

नकली दवा कारोबार से जुड़े लोगों ने एफएसडीए द्वारा तैयार कराए गए मार्ग सॉफ्टवेयर में भी सेंध लगा दी। फर्जी बिलिंग के चक्कर में इस सॉफ्टवेयर की कई प्रक्रियाओं पर लगे पाबंदी को खोल लिया। ऐसे में अब सभी दवा कारोबारियों द्वारा प्रयोग किए जा रहे सॉफ्टवेयर की भी पड़ताल कराई जाएगी।



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