प्रवासी पक्षियों को आगरा का वातावरण रास आ रहा है। इसके चलते मध्य एशिया, साइबेरिया, उत्तरी यूरेशिया समेत विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले पक्षियों की संख्या बढ़ रही है। इस बार ये जल्दी आने लगे हैं। इससे सूर सरोवर, जोधपुर झाल, चंबल नदी गुलजार होने लगे हैं। प्रवासी पक्षियों की बढ़ती आबादी से वन विभाग भी उत्साहित है।

आगरा और आसपास के वेटलैंड में ठंड में प्रवास के लिए ग्रेट व्हाइट पेलिकन, डालमेशियन पेलिकन, ग्रेटर फ्लेमिंगो, ब्लैक-टेल्ड गोडविट, डोमीसाइल क्रेन, नॉर्दर्न पिनटेल, नॉर्दर्न शोवलर, कॉमन टील, गार्गेनी, कॉमन पोचार्ड, फेरुगिनस डक, काॅमन शेल्डक, रेड-क्रेस्टेड पोचार्ड, बार-हेडेड गूज, ग्रे-लैग गूज और रूडी शेलडक समेत 100 से अधिक तरह के प्रवासी आते हैं। कॉमन सैंडपाइपर, कॉमन रेडशैंक, स्पॉटेड रेडशैंक, कॉमन ग्रीनशैंक, लिटिल स्टिंट और ब्लैक-टेल्ड गॉडविट की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। ये किनारों पर भोजन करने वाले पक्षी हैं। ब्लूथ्रोट, येलो वैगटेल और सिट्रिन वैगटेल छोटे प्रवासी पक्षी भी खुले क्षेत्रों और जलाशयों के आसपास दिखाई दे रहे हैं।

भोजन के लिए लंबा सफर कर आते हैं पक्षी

डीएसओ राजेश कुमार ने बताया कि विदेशों में सर्दियों में झीलें जम जाती हैं। इससे भोजन नहीं मिल पाता। ऐसे में ये पक्षी हजारों किमी दूर आगरा में आ जाते हैं। यहां उनके मुताबिक वातावरण और पर्याप्त भोजन मिलता है। 25 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान होने पर ये लौटने लगते हैं।

हर साल बढ़ रही संख्या, भोजन की पर्याप्त व्यवस्था

ईकोलॉजिस्ट बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डेवलपमेंट सोसाइटी के डॉ. केपी सिंह ने बताया कि प्रवासी पक्षियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कुछ प्रजाति ऐसी हैं, जो इस दौरान प्रजनन भी करते हैं। ऐसे में वेटलैंड, झील और जलाशयों पर इनका कुनबा भी बढ़ रहा है।

 



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