आगरा। एक छोटे से केबल को ठीक कराने से शुरू हुआ विवाद दो दशक तक अदालत में चला। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम विनीता सिंह ने बालाजी नगर निवासी विशंभर को दोषी ठहराया। हालांकि, उसे पहला अपराध मानते हुए एक साल की परिवीक्षा पर रिहा कर दिया गया।
घटना 8 अक्तूबर, 2006 को थाना जगदीशपुरा क्षेत्र में हुई थी। प्राथमिकी के मुताबिक, बालाजीपुरम निवासी मीना अपनी दुकान पर सिलाई कर रही थीं। पड़ोसी रमजानी, कल्ला, विशंभर और आसिफ सरिया, फावड़ा और हॉकी लेकर पहुंचे। केबल ठीक कराने के लिए विवाद बढ़ा और मीना के सिर पर चोट लगी। उसकी चीख सुनकर भाई अनवर बाहर आया तो आरोपियों ने उससे भी मारपीट की। दुकान और घर का सामान तोड़ा और जान से मारने की धमकी दी।
भाई-बहन की गवाही बनी आधार
मुकदमे के दौरान कई गवाह अदालत नहीं पहुंचे। अभियोजन को साक्ष्य के लिए अवसर भी दिए गए। गैरजमानती वारंट के बावजूद वे नहीं आए। इसके बाद मीना और अनवर की गवाही ने मुकदमे को सहारा दिया। अदालत ने विशंभर को दोषी माना। हालांकि विशेष चोट पहुंचाने का स्पष्ट साक्ष्य न मिलने पर उसे इस आरोप में संदेह का लाभ दिया गया।

