चकरनगर (इटावा)। गढ़ाकासदा गांव में 14 दिन में बुखार से पीड़ित तीसरे बच्चे की गुरुवार सुबह मौत हो गई। बच्चे की बहन जिला अस्पताल में भर्ती है। डेंगू की आशंका से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। बच्चे के परिजन डेंगू से मौत होने की बात कह रहे हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग वायरल होने का दावा कर रहा है। लगातार तीसरी मौत की सूचना से प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में खलबली मची है। गुरुवार को एसडीएम ने अधिकारियों के साथ गांव का जायजा लिया। विभाग की टीम ने कैंप लगाकर 50 लोगों के सैंपल लेकर ग्रामीणों की जांच कर दवा वितरित की।
गढ़ाकासदा निवासी भारत सिंह ने बताया कि बेटे किशन (7) को 26 अगस्त से बुखार आ रहा था। पहले बाबरपुर में उपचार कराया, लेकिन आराम नहीं मिला। बुधवार सुबह करीब उसे इटावा के निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। उपचार के दौरान रात करीब एक बजे उसकी हालत बिगड़ गई। परिजन ने बताया रात करीब दो बजे मल के रास्ते खून आने पर डॉक्टरों ने हालत गंभीर बताते हुए आगरा या दिल्ली ले जाने की सलाह दी। गुरुवार सुबह आगरा ले जाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई। परिजन का कहना है कि डॉक्टर ने डेंगू से मौत की बात बताई थी। भारत सिंह की बेटी रोशनी का प्लेट्लेट्स कम होने पर उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया है।
उधर, स्वास्थ्य विभाग बच्चे की मौत डेंगू से होने की पुष्टि नहीं कर रहा है। बच्चे की मौत के बाद एसडीएम रोहित कुमार मौर्य और बीडीओ यदुवीर सिंह गांव पहुंचे। अधिकारियों ने मृतक के परिजनों से मुलाकात कर गांव की स्थिति की जानकारी ली। एसडीएम ने सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराने और लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए। ग्रामीणों का दावा है कि गांव में लगभग हर घर में कोई न कोई सदस्य बुखार या अन्य बीमारी से पीड़ित है। ग्रामीणों ने गांव में जांच, सफाई और दवा का छिड़काव कराने की मांग की है।
गढ़ाकासदा निवासी महेंद्र दोहरे के पुत्र सतेंद्र दोहरे (13) की 20 अगस्त को बुखार से मौत हो गई थी। परिजनों के अनुसार खून की उल्टी और दस्त आने के कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई थी। इसके अगले दिन मुकेश सिंह की बेटी गुनगुन (12) को बुखार आया। परिजन उसे उपचार के लिए बाबरपुर औरैया के निजी डॉक्टर के पास ले गए, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई थी।
उच्चाधिकारियों के आदेश पर गांव में शिविर लगाकर 50 लोगों की मलेरिया व डेंगू की जांच की गई है। सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई है। गांव में जिस बच्चे की मौत हुई है, उसकी डेंगू की जांच नहीं हुई थी। गांव में एंटी लार्वा दवा का छिड़काव कर ग्रामीणों को सफाई के प्रति जागरूक किया जा रहा है। -डॉ. एसएन सिंह, जिला मलेरिया अधिकारी
