सरकारी कागजों में मृत घोषित हो चुकी चंदा देवी इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच कर बोली… मैं जिंदा हूं साहब, मेरा राशन कार्ड बनवा दीजिए। महिला की गुहार पर हैरान न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ल की खंडपीठ ने शुक्रवार को प्रयागराज के डीएम, जिला पूर्ति अधिकारी और प्रतापपुर, हंडिया के वारी के ग्राम प्रधान को स्पष्टीकरण के साथ तलब किया है। कोर्ट ने सुनवाई के वक्त महिला को भी मौजूद रहने का निर्देश दिया है।

कोर्ट पहुंची महिला ने बताया कि वह प्रतापपुर, हंडिया के वारी गांव की रहने वाली है। पति साधुराम का निधन हो गया है लेकिन मैं जिंदा हूं। इसके बावजूद सरकारी दस्तावेजों में उसे भी मृत घोषित दर्ज कर दिया गया है। इसके कारण न तो राशन कार्ड बन पा रहा है और न ही उसे सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है। महिला ने दावा किया कि कई बार अधिकारियों के चक्कर लगाने के बावजूद उसकी सुनवाई नहीं हुई।

मजबूर होकर उसे हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी। कोर्ट ने इसे नागरिक के मूल अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला माना। कहा कि यदि कोई जीवित व्यक्ति सरकारी अभिलेखों में मृत दर्ज है तो यह केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि उसके संवैधानिक और वैधानिक अधिकारों पर सीधा प्रहार है।

कोर्ट ने जिले के आला अधिकारियों को अदालत में पेश होकर यह स्पष्ट करने को कहा कि आखिर जीवित महिला को किन परिस्थितियों में नागरिक आपूर्ति विभाग ने उन्हें मृत दर्ज कर दिया। अगर भूल है तो अब तक इसे सुधारा क्यों नहीं गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि डीएम और डीएसओ यह भी सत्यापित करना होगा कि चंदा देवी वास्तव में साधुराम की विधवा हैं या नहीं।



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