उरई। दवाओं पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की दर 12 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी किए जाने के बावजूद मरीजों को दवाओं की कीमतों में राहत नहीं मिल पा रही है। दवा कंपनियों ने कच्चे माल की लागत और परिवहन खर्च बढ़ने का हवाला देकर कई दवाओं के दाम बढ़ा दिए हैं। इससे मधुमेह, किडनी, संक्रमण और पेट संबंधी बीमारियों से जूझ रहे उन मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है, जिन्हें नियमित रूप से दवाएं खरीदनी पड़ती हैं।


दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी का असर उन परिवारों के बजट पर भी पड़ता है, जिनके घर में कोई सदस्य लंबे समय से बीमार है। ऐसे मरीजों को हर महीने दवाओं पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है। जीएसटी में कमी के बाद लोगों को उम्मीद थी कि दवाएं सस्ती होंगी, लेकिन कीमतें बढ़ने से राहत की उम्मीद को झटका लगा है। कैमिस्ट संतोष अग्रवाल ने बताया कि बैक्टीरियल संक्रमण से बचाव करने वाली दवा सल्टामिसिलिन 459 रुपए से बढ़कर 490 रुपए प्रति दस गोली हो गई है। वहीं, दर्द, सूजन में आराम देने वाली जीरोडोल एसपी 139 रुपए से बढ़कर 150 रुपए, मतली व उल्टी से राहत देने वाली ओसीड डी दवा 198 रुपए से बढ़कर 218 रुपए की मिल रही है। सीने में जलन व पेप्टिक अल्सर से बचाव के लिए दी जाने वाली पैन-40 दवा 175 रुपए से बढ़कर 192 रुपए की हो गई है। किडनी स्टोन में आराम देने वाली अल्कासोल 140 रुपए से बढ़कर 147 रुपए व मल्टीविटामिन सुप्राडिन 62 रुपए से बढ़कर 75 रुपए की बिक रही है।



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