बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) की हरित क्षेत्र औद्योगिक शहर परियोजना को केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की ओर से पर्यावरण स्वीकृति मिल गई है। अब बीडा में निवेश, उद्योग स्थापना से लेकर आधारभूत ढांचे के विकास को मिलेगी गति। इससे बदलेगी बुंदेलखंड की तस्वीर भी बदलेगी।
झांसी के 33 गांवों में ली जाने वाली 62,599 एकड़ भूमि पर इस अत्याधुनिक औद्योगिक शहर को विकसित किया जाना है। इसके लिए अब तक 25706 एकड़ भूमि खरीदी जा चुकी है। शुरुआत में एक हजार में बीडा के एक्टिवेशन एरिया को विकसित करने की तैयारी है। दूसरी तरफ, निवेशकों की ओर से भी बीडा में उद्योग की स्थापना के लिए भी प्रस्ताव प्राप्त हो रहे हैं लेकिन परियोजना के काम को रफ्तार देने के लिए पर्यावरण मंजूरी का इंतजार था। इसके लिए पिछले साल से कवायद शुरू हुई। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति ने 30 जून 2025 को इस परियोजना की रूपरेखा को परखा। 20 जुलाई 2025 मंत्रालय ने इसे अपनी पहली मंजूरी दे दी। इसके बाद स्थानीय नगारिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पिछले साल 22 दिसंबर को एडीएम की अध्यक्षता में जनसुनवाई की गई। परियोजना से संबंधित सभी पर्यावरणीय पहलुओं, तकनीकी विवरणों और जरूरी सुधारों की विशेषज्ञ समिति ने इस साल पांच मार्च और नौ-दस अप्रैल को समीक्षा की। मानकों पर खरा उतरने के बाद समिति ने बीडा को पर्यावरण स्वीकृति देने की सिफारिश कर दी थी।
5.6 लाख युवाओं को रोजगार के आसार, ग्रामीण आबादी का होगा विकास
मास्टर प्लान 2045 के तहत इस औद्योगिक शहर के जरिये 5.6 लाख से ज्यादा युवाओं को रोजगार मिलने के आसार हैं। यही नहीं, स्थानीय ग्रामीण आबादी क्षेत्रों को बीडा के साथ एकीकृत करते हुए आधुनिक पार्क, स्वास्थ्य केंद्र, शैक्षणिक संस्थान और कौशल विकास केंद्र जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
हरित बफर जोन से लेकर शून्य तरल विसर्जन सिस्टम तक
परियोजना सीमा पर 50 मीटर और डोंगरी बांधी के चारों ओर 150 मीटर चौड़ा ग्रीन बेल्ट विकसित होगा। इसके अलावा 217.22 एमएलडी शहर की पेयजल आवश्यकता राजघाट बांधी से पूरी की जाएगी। जबकि अन्य उपयोगों के लिए उपचारित जल का प्रयोग किया जाएगा। बीडा द्वारा 163.26 एमएलडी क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और 150.88 एमएलडी क्षमता का कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट चरणबद्ध तरीके से स्थापित होगा। उपयोग जल का उपचार कर पुन: इस्तेमाल किया जाएगा। किसी भी प्रकार का अपशिष्ट जल बेतवा, पहूज और अंगौरी नदियों में नहीं छोड़ा जाएगा।
बीडा में इस तरह होना है भू-उपयोग
33.02 फीसदी औद्योगिक क्षेत्र: 83.66 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र औद्योगिक विकास के लिए आरक्षित है। यहां कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र, रक्षा उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स, डाटा सेंटर और इलेक्टि्रक वाहन उद्योग स्थापित किए जाएंगे।
16.90 फीसदी आवासीय एवं आबादी क्षेत्र: नए आवासीय क्षेत्रों के लिए 37.40 वर्ग किलोमीटर और मौजूदा ग्रामीण आबादी के लिए 5.40 वर्ग किलोमीटर भूमि निर्धारित की गई है।
24.92 फीसदी हरित एवं मनोरंजक क्षेत्र: 63.13 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को हरित क्षेत्र के रूप में संरक्षित रखा गया है।
11.56 फीसदी परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स: सड़क, रेल और लॉजिस्टिक्स हब के विकास के लिए 29.30 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र आवंटित किया गया है।
व्यावसायिक, मिश्रित एवं अन्य उपयोग: शेष भूमि को व्यावसायिक (3.92 वर्ग किलोमीटर), मिश्रित उपयोग (13.02 वर्ग किलोमीटर) और सार्वजनिक संस्थानों के लिए आरक्षित किया गया है।
पर्यावरण मंत्रालय से प्राप्त यह पर्यावरणीय स्वीकृति बुंदेलखंड के विकास के इतिहास में नए अध्याय की शुरुआत है। बीडा को देश की सबसे आधुनिक, सतत और पर्यावरण अनुकूल औद्योगिक स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा। यह परियोजना बुंदेलखंड को वैश्विक विनिर्माण मानचित्र पर स्थापित करेगी। स्थानीय नागरिकों के जीवन स्तर में व्यापक सुधार लाएगी। – संजय खत्री, सीईओ, बीडा।
