सरोजनीनगर। मौत की आशंका वाले मामले में पीड़ित का बयान जांच के लिए अहम साक्ष्य बन सकता है। ऐसे में उसका बयान तत्काल दर्ज किया जाना चाहिए और संभव हो तो उसकी डिजिटल रिकॉर्डिंग भी कराई जानी चाहिए। उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने मंगलवार को प्रांतीय सिविल सेवा (पीसीएस) 2025 बैच के 38 प्रशिक्षु अधिकारियों को फॉरेंसिक विज्ञान की बारीकियां समझाते हुए यह बात कही।

कानपुर रोड के दरोगाखेड़ा स्थित संस्थान के भ्रमण पर पहुंचे प्रशिक्षु अधिकारियों ने डीएनए और ड्रोन लैब का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्हें फॉरेंसिक विज्ञान में इस्तेमाल होने वाली आधुनिक तकनीकों और उनकी कार्यप्रणाली की जानकारी दी गई।

डॉ. गोस्वामी ने कहा कि फॉरेंसिक साइंस के माध्यम से सच्चाई को वैज्ञानिक रूप से कानून के समक्ष लाकर न्याय दिलाने में सहयोग करना संस्थान का मूल उद्देश्य है। फील्ड में सिविल सेवा का कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण है और इसमें त्याग व समर्पण की जरूरत होती है। अधिकारियों को विषम परिस्थितियों से निपटने के लिए मानसिक रूप से सदैव तैयार रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कानून और विज्ञान का संगम ही फॉरेंसिक विज्ञान है और फॉरेंसिक एक विजन है। साइबर और फॉरेंसिक विज्ञान आज जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। आधुनिक तकनीक पर बढ़ती निर्भरता के कारण व्यक्ति हर जगह अपना डिजिटल फुटप्रिंट छोड़ता है। निरीक्षण के दौरान पुलिस अधीक्षक चिरंजीव मुखर्जी, अतुल यादव, पलक अनेजा, सेंथिल शिव सुब्रमण्यम, जनसंपर्क अधिकारी संतोष कुमार तिवारी, आरआई शैलेंद्र सिंह सहित शैक्षणिक संवर्ग के संकाय मौजूद रहे।



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