Muzaffarnagar। खतौली थाना क्षेत्र में घोड़ों की रेस पर हार-जीत की बाजी लगाकर कथित तौर पर जुआ खेलने की तैयारी कर रहे लोगों के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। फुलत रोड पर नहर के आगे पेड़ों के नीचे घोड़ों की रेस के जरिए जुए का खेल शुरू होने से पहले ही पुलिस ने दबिश देकर 12 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के अनुसार, कार्रवाई के दौरान मौके से सट्टे की 53,200 रुपये की नकदी, दो घोड़े, दो वाहन, छह मोबाइल फोन और घोड़ों को हांकने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कमची यानी छड़ी बरामद की गई है।
पुलिस की कार्रवाई उस समय हुई जब कथित तौर पर रेस की तैयारी चल रही थी। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने पहले मौके की पुष्टि कराई और फिर चारों तरफ से घेराबंदी करते हुए दबिश दी। पुलिस के मुताबिक, रेस शुरू होने से पहले ही सभी 12 आरोपियों को पकड़ लिया गया।
फुलत रोड पर पेड़ों के नीचे चल रही थी रेस की तैयारी
घटना 26 अगस्त की बताई गई है। पुलिस के अनुसार, उप-निरीक्षक अनिल तोमर पुलिस टीम के साथ भैंसी कट के पास गश्त और चेकिंग कर रहे थे। इसी दौरान पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि फुलत रोड पर नहर के आगे पेड़ों के नीचे कुछ लोग घोड़ों की रेस पर जुआ खेलने की तैयारी कर रहे हैं।
सूचना में यह भी बताया गया कि रेस के लिए घोड़ों को तैयार किया जा रहा है और उन्हें छड़ियों से हांका जा रहा है।
मामले की सूचना को गंभीरता से लेते हुए उप-निरीक्षक अनिल तोमर ने इसकी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों और थाना स्तर पर साझा की। इसके बाद खतौली थाने से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया।
पुलिस ने बनाई रणनीति, सादे कपड़ों में पहुंचाए सिपाही
पुलिस के सामने चुनौती यह थी कि मौके पर मौजूद लोगों को कार्रवाई की भनक न लगे। इसी वजह से पुलिस टीम ने पहले रणनीति तैयार की।
पुलिस के मुताबिक, कुछ सिपाहियों को सादे कपड़ों में मौके पर भेजा गया ताकि वहां मौजूद गतिविधियों और लोगों की संख्या की पुष्टि की जा सके।
जैसे ही सादे कपड़ों में पहुंचे पुलिसकर्मियों ने मौके की पुष्टि की, मुख्य पुलिस टीम को संकेत दिया गया। इसके बाद पुलिस ने चारों ओर से घेराबंदी कर दबिश दी।
अचानक हुई कार्रवाई से वहां मौजूद लोगों को संभलने का ज्यादा मौका नहीं मिला और पुलिस ने रेस शुरू होने से पहले ही 12 लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
रेस शुरू होती, उससे पहले पहुंच गई पुलिस
इस कार्रवाई का सबसे अहम पहलू यह रहा कि पुलिस ने कथित घुड़दौड़ शुरू होने से पहले ही मौके पर पहुंचकर आरोपियों को पकड़ लिया।
यदि पुलिस कुछ देर और करती तो रेस शुरू हो सकती थी और हार-जीत पर लगाई जा रही कथित बाजी का खेल आगे बढ़ जाता।
पुलिस के अनुसार, मौके पर मौजूद लोगों के पास से सट्टे की नकदी और अन्य सामान बरामद किया गया। दो घोड़े भी मौके से मिले।
53,200 रुपये की नकदी बरामद
पुलिस ने मौके से 53,200 रुपये की नकदी बरामद किए जाने की जानकारी दी है। पुलिस के अनुसार यह रकम सट्टे से संबंधित थी।
जुए और सट्टेबाजी के मामलों में नकदी की बरामदगी जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है। पुलिस बरामद रकम के स्रोत और उसके इस्तेमाल से जुड़े तथ्यों की भी जांच कर सकती है।
इस मामले में भी बरामद नकदी को पुलिस ने अपने कब्जे में लेकर संबंधित कानूनी प्रक्रिया शुरू की है।
दो घोड़े और दो वाहन भी पुलिस के कब्जे में
नकदी के अलावा मौके से दो घोड़े और दो वाहन भी बरामद किए गए। पुलिस के अनुसार, इन घोड़ों का इस्तेमाल कथित तौर पर रेस के लिए किया जाना था।
दो वाहनों की मौजूदगी भी जांच का हिस्सा हो सकती है। पुलिस यह पता लगा सकती है कि वाहन किसके हैं और उन्हें मौके तक किस उद्देश्य से लाया गया था।
मामले में बरामद सभी वस्तुओं को पुलिस ने अपनी कार्रवाई में शामिल किया है।
छह मोबाइल फोन भी बरामद
पुलिस ने छह मोबाइल फोन बरामद करने की भी जानकारी दी है। जुए और सट्टेबाजी से जुड़े मामलों में मोबाइल फोन का इस्तेमाल आपसी संपर्क और गतिविधियों के समन्वय के लिए किया जा सकता है।
हालांकि इन मोबाइल फोन में क्या जानकारी है और उनका उपयोग किस उद्देश्य से किया गया था, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
पुलिस बरामद मोबाइल फोन से जुड़े तथ्यों को भी विवेचना का हिस्सा बना सकती है।
घोड़ों को हांकने वाली कमची भी मिली
मौके से घोड़ों को हांकने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कमची यानी छड़ी भी बरामद की गई। पुलिस के अनुसार, सूचना में बताया गया था कि रेस के लिए घोड़ों को छड़ियों से हांका जा रहा था।
घोड़ों के इस्तेमाल से जुड़े पूरे घटनाक्रम की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है। पशुओं के साथ किसी भी प्रकार की अनुचित या क्रूर व्यवहार की स्थिति सामने आती है तो उसके अनुरूप संबंधित कानूनी प्रावधानों पर भी विचार किया जा सकता है।
पुलिस की दबिश से मौके पर मचा हड़कंप
जैसे ही पुलिस ने चारों तरफ से घेराबंदी कर दबिश दी, मौके पर मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। पुलिस के अचानक पहुंचने से कथित तौर पर जुआ खेलने की तैयारी कर रहे लोगों को भागने का मौका नहीं मिला।
पुलिस टीम ने एक-एक कर सभी आरोपियों को हिरासत में लिया। इसके बाद मौके से बरामद सामान को कब्जे में लिया गया।
कार्रवाई के बाद क्षेत्र में भी यह खबर तेजी से फैल गई कि फुलत रोड पर घोड़ों की रेस के नाम पर चल रहे कथित जुए के आयोजन को पुलिस ने शुरू होने से पहले ही रोक दिया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हुई
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान कलीम, मजहर, जीशान, जाहिद, दिलजान, हाशिम, आसिफ, शमशाद, बारू, आजाद, ताहिर और इरशाद के रूप में हुई है।
पुलिस ने सभी आरोपियों को हिरासत में लेकर उनके खिलाफ संबंधित कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
जांच में यह भी देखा जाएगा कि मौके पर मौजूद प्रत्येक व्यक्ति की कथित भूमिका क्या थी और जुए की गतिविधि में उसकी भागीदारी किस स्तर तक थी।
मुजफ्फरनगर के अलावा दूसरे जिलों से भी पहुंचे थे लोग
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में मुजफ्फरनगर जनपद के विभिन्न थाना क्षेत्रों के रहने वाले लोग शामिल हैं। इसके अलावा हरिद्वार जिले के मंगलौर तथा बुलंदशहर जिले के गुलावठी क्षेत्र के रहने वाले आरोपी भी बताए गए हैं।
इससे यह संकेत मिलता है कि कथित आयोजन में केवल स्थानीय लोगों की ही मौजूदगी नहीं थी।
हालांकि अलग-अलग स्थानों से आए लोगों की वास्तविक भूमिका और आपसी संपर्क की स्थिति जांच का विषय है। पुलिस इनके बीच संबंधों और मौके पर एकत्र होने के कारणों की भी पड़ताल कर सकती है।
खतौली पुलिस की कार्रवाई से जुए के आयोजन पर लगा ब्रेक
खतौली थाना क्षेत्र में हुई यह कार्रवाई पुलिस की गश्त और मुखबिर तंत्र के आधार पर की गई कार्रवाई के रूप में सामने आई है। उप-निरीक्षक अनिल तोमर की टीम को मिली सूचना के बाद पुलिस ने तुरंत अतिरिक्त बल बुलाया और मौके पर दबिश दी।
रेस शुरू होने से पहले ही आरोपियों की गिरफ्तारी होने के कारण पुलिस को कथित जुए के आयोजन को रोकने में सफलता मिली।
सट्टेबाजी के खिलाफ पुलिस की सख्ती
जुआ और सट्टेबाजी की गतिविधियां कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती हैं। हार-जीत पर पैसे लगाने का खेल कई बार आर्थिक विवाद, आपसी झगड़े और अन्य आपराधिक गतिविधियों तक पहुंच सकता है।
इसी वजह से पुलिस समय-समय पर ऐसे स्थानों पर कार्रवाई करती है जहां जुए या सट्टेबाजी की गतिविधियों की सूचना मिलती है।
फुलत रोड की कार्रवाई में भी पुलिस ने सूचना मिलने के बाद तत्काल कार्रवाई का रास्ता अपनाया।
घोड़ों की रेस की आड़ में कथित जुआ
पुलिस के अनुसार, यहां सामान्य घुड़दौड़ का आयोजन नहीं बल्कि हार-जीत पर पैसे की बाजी लगाने की तैयारी थी। यही पहलू मामले को जुए और सट्टेबाजी से जोड़ता है।
घुड़दौड़ अपने आप में अलग तरह की खेल गतिविधि हो सकती है, लेकिन जब उसके परिणाम पर अवैध रूप से धन की बाजी लगाई जाती है तो मामला अलग कानूनी संदर्भ में आ जाता है।
इस मामले में पुलिस ने इसी आरोप के आधार पर कार्रवाई की है।
नहर के आगे पेड़ों के नीचे बनाया गया था अस्थायी ठिकाना
फुलत रोड पर नहर के आगे पेड़ों के नीचे लोगों के एकत्र होने की सूचना पुलिस को मिली थी। अपेक्षाकृत खुले और कम आबादी वाले स्थानों का इस्तेमाल कई बार अवैध गतिविधियों के लिए किए जाने की आशंका रहती है क्योंकि वहां बाहरी लोगों की निगरानी कम हो सकती है।
पुलिस ने सूचना मिलने के बाद पहले मौके की पुष्टि की और फिर घेराबंदी की। इससे कथित आयोजन के आयोजकों या प्रतिभागियों को पुलिस की मौजूदगी का पहले से पता नहीं चला।
मुखबिर की सूचना से खुला मामला
इस पूरे घटनाक्रम में मुखबिर की सूचना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गश्त के दौरान उप-निरीक्षक अनिल तोमर को गतिविधि के बारे में जानकारी मिली।
पुलिस के लिए स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र अपराध रोकथाम में महत्वपूर्ण होता है। यदि समय रहते अवैध गतिविधि की जानकारी मिल जाए तो पुलिस किसी घटना के होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय उसे पहले ही रोक सकती है।
इस मामले में भी कथित रेस शुरू होने से पहले कार्रवाई हो गई।
पुलिस ने पहले पुष्टि की, फिर की कार्रवाई
पुलिस ने सीधे भीड़ के बीच पहुंचने के बजाय पहले सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों को मौके पर भेजकर स्थिति की पुष्टि की। यह तरीका कार्रवाई के दौरान अचानकपन बनाए रखने में मददगार रहा।
लोकेशन की पुष्टि होने के बाद चारों तरफ से घेराबंदी कर दबिश दी गई। इस रणनीति के कारण मौके पर मौजूद सभी 12 आरोपियों को पकड़ने में पुलिस सफल रही।
जांच में सामने आएंगे आयोजन से जुड़े अन्य पहलू
अब पुलिस के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि कथित घुड़दौड़ के आयोजन की योजना किसने बनाई थी, इसमें धन की बाजी किस स्तर पर लगाई जा रही थी और आरोपियों की आपसी भूमिका क्या थी।
बरामद मोबाइल फोन, नकदी, वाहनों और अन्य सामान से जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
पुलिस यह भी जांच कर सकती है कि क्या इस तरह की गतिविधि पहले भी आयोजित की जाती रही है या यह पहली बार हुआ था।
क्या पहले भी होती रही थी ऐसी रेस?
इस सवाल का जवाब फिलहाल पुलिस जांच के बाद ही सामने आ सकेगा। यदि जांच में यह पाया जाता है कि फुलत रोड या आसपास के क्षेत्र में पहले भी इसी तरह की गतिविधियां हुई थीं, तो पुलिस आगे की कार्रवाई उसी आधार पर कर सकती है।
वहीं, यदि यह एक अलग और पहली घटना थी, तो भी गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ दर्ज मामले के अनुसार कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
घोड़ों के इस्तेमाल की भी जांच जरूरी
मौके से दो घोड़ों की बरामदगी इस मामले का एक अलग पहलू है। पुलिस ने बताया कि घोड़ों को रेस के लिए तैयार किया जा रहा था।
घोड़ों की स्थिति, उनके रखरखाव और रेस के दौरान उनके साथ किए जाने वाले व्यवहार की भी जांच महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि पशुओं के प्रति किसी प्रकार के अनुचित व्यवहार के तथ्य सामने आते हैं तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई का प्रश्न भी उठ सकता है।
मोबाइल फोन और नकदी जांच में महत्वपूर्ण कड़ी बन सकते हैं
छह मोबाइल फोन और 53,200 रुपये की बरामदगी पुलिस की विवेचना के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। मोबाइल फोन से आरोपियों के बीच संपर्क, कथित आयोजन की तैयारी और अन्य संबंधित गतिविधियों की जानकारी मिलने की संभावना रहती है।
हालांकि किसी मोबाइल फोन की बरामदगी मात्र से उसमें मौजूद हर जानकारी को अपराध का प्रमाण नहीं माना जा सकता। उसमें उपलब्ध सामग्री की वैधानिक जांच और उसका संदर्भ महत्वपूर्ण होगा।
इसी तरह बरामद नकदी के बारे में भी पुलिस को जांच के आधार पर यह स्थापित करना होगा कि उसका कथित जुए से क्या संबंध था।
कानूनी कार्रवाई के बाद मामला अदालत तक पहुंचेगा
पुलिस ने गिरफ्तार सभी आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू करने की जानकारी दी है। आगे की प्रक्रिया में आरोपियों को न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना होगा।
किसी भी आरोपी को केवल गिरफ्तारी के आधार पर दोषी नहीं माना जा सकता। मामले में अंतिम दोषसिद्धि न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों और पूरी न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगी।
स्थानीय लोगों ने पुलिस कार्रवाई को बताया अहम
घटना की जानकारी फैलने के बाद स्थानीय लोगों के बीच भी पुलिस की कार्रवाई चर्चा का विषय रही। ग्रामीण क्षेत्र में खुले स्थान पर घोड़ों की रेस के नाम पर कथित जुए की गतिविधि को लेकर लोगों में चिंता भी जताई गई।
स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसे आयोजनों पर समय रहते रोक लगना जरूरी है ताकि इलाके में गैरकानूनी गतिविधियों को बढ़ावा न मिले।
खतौली क्षेत्र में पुलिस की निगरानी का असर
गश्त के दौरान सूचना मिलना और उसके बाद त्वरित कार्रवाई होना बताता है कि पुलिस ने स्थानीय क्षेत्र में निगरानी बढ़ा रखी है। हालांकि किसी भी एक कार्रवाई से पूरे क्षेत्र की स्थिति का आकलन नहीं किया जा सकता।
लगातार गश्त, सूचना तंत्र और संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी से अवैध जुआ और सट्टेबाजी जैसी गतिविधियों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
12 गिरफ्तारियों ने मचाई हलचल
फुलत रोड पर एक साथ 12 लोगों की गिरफ्तारी ने मामले को बड़ा बना दिया है। पुलिस ने केवल एक-दो लोगों को पकड़ने के बजाय मौके पर मौजूद सभी कथित जुआरियों को हिरासत में लिया।
दो घोड़े, दो वाहन, छह मोबाइल और 53,200 रुपये की नकदी की बरामदगी ने कार्रवाई को और महत्वपूर्ण बना दिया है।
अब आगे की जांच में यह स्पष्ट होगा कि कथित आयोजन का संचालन किस स्तर पर किया जा रहा था और इसमें शामिल लोगों की वास्तविक भूमिका क्या थी।
मुजफ्फरनगर में जुए के खिलाफ कार्रवाई का बड़ा संदेश
खतौली थाना क्षेत्र की इस कार्रवाई ने यह संकेत दिया है कि पुलिस को यदि किसी स्थान पर जुआ या सट्टेबाजी की विश्वसनीय सूचना मिलती है तो वह मौके पर कार्रवाई कर सकती है।
फुलत रोड पर कथित घुड़दौड़ शुरू होने से पहले ही पुलिस पहुंच गई। रणनीतिक घेराबंदी के कारण 12 आरोपी पकड़े गए और मौके से संबंधित सामान बरामद किया गया।
अब मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और विवेचना यह तय करेगी कि आरोपों को अदालत के सामने किस तरह साबित किया जाता है।
फुलत रोड पर रेस से पहले पुलिस की ‘एंट्री’, 12 लोग हिरासत में
फुलत रोड पर 26 अगस्त को जिस कथित घुड़दौड़ और सट्टेबाजी की तैयारी की सूचना पुलिस तक पहुंची थी, वह रेस शुरू होने से पहले ही खत्म हो गई। पुलिस ने सादे कपड़ों में पहले मौके की पुष्टि कराई और फिर चारों ओर से घेराबंदी कर दबिश दी।
कार्रवाई में कलीम, मजहर, जीशान, जाहिद, दिलजान, हाशिम, आसिफ, शमशाद, बारू, आजाद, ताहिर और इरशाद को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी गई है।
मौके से 53,200 रुपये की नकदी, दो घोड़े, दो गाड़ियां, छह मोबाइल फोन और कमची बरामद हुई है। पुलिस ने सभी के खिलाफ संबंधित धाराओं में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
