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संस्कृत के श्लोकों और वैदिक मंत्रों की गूंज के बीच रविवार को संपूर्णानंद संस्कृत विवि का योग साधना केंद्र छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति और जनजातीय विरासत के रंगों से सराबोर हो उठा। विद्यार्थियों ने लोकगीतों, भाषणों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की पहचान से परिचित कराया। वहीं, सतर्कता जागरूकता सप्ताह के तहत ईमानदारी, पारदर्शिता और कर्तव्यनिष्ठा को श्रेष्ठ एवं समृद्ध भारत की आधारशिला बताया गया।

कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा की अध्यक्षता में हुए इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक, सामाजिक, भौगोलिक और सांस्कृतिक विशेषताओं को प्रस्तुत किया गया। कुलपति ने कहा कि विभिन्न राज्यों के स्थापना दिवस विद्यार्थियों को भारत की बहुआयामी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने का सशक्त माध्यम हैं। प्रत्येक राज्य अपनी विशिष्ट पहचान और सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित करते हुए राष्ट्र की प्रगति में योगदान दे, यही विविधता में एकता का वास्तविक स्वरूप है। सभी की सहभागिता, सम्मान और समन्वय से ही सशक्त, समृद्ध एवं गौरवशाली राष्ट्र का निर्माण संभव है। यही ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की वास्तविक आत्मा है। संचालन सह-नोडल अधिकारी डॉ. रविशंकर पांडेय ने किया। राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ। कुलसचिव राकेश कुमार, डॉ. उमाशंकर उपाध्याय, डॉ. श्रुति उपाध्याय सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

लघु फिल्म से दिखाई छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा

कार्यक्रम के नोडल अधिकारी एवं छात्र कल्याण संकाय प्रमुख प्रो. शैलेश कुमार मिश्र ने स्वागत भाषण में आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक, सामाजिक, भौगोलिक एवं सांस्कृतिक विशेषताओं के साथ वहां की समृद्ध विरासत और विशिष्ट परंपराओं पर प्रकाश डाला। इस दौरान छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा, जनजातीय संस्कृति, लोकजीवन और ऐतिहासिक विशेषताओं पर आधारित लघु फिल्म दिखाई गई।

ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से बनेगा समृद्ध भारत

सतर्कता जागरूकता सप्ताह-2026 के तहत सतर्क नागरिक, सुरक्षित राष्ट्र और श्रेष्ठ एवं समृद्ध भारत विषय पर भी जागरूकता कार्यक्रम हुआ। विज्ञान विभागाध्यक्ष एवं कुलानुशासक प्रो. जितेन्द्र कुमार तथा प्रो. जितेंद्र कुमार शाही ने इस विषय पर विचार रखे। प्रो. जितेन्द्र कुमार शाही ने कहा कि राष्ट्र की समृद्धि केवल आर्थिक विकास से सुनिश्चित नहीं होती, बल्कि इसके लिए नागरिकों का नैतिक चरित्र, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा भी जरूरी है।

स्रोत: https://www.amarujala.com/uttar-pradesh/varanasi/sanskrit-university-resonates-with-the-folk-songs-of-chhattisgarh-students-gain-insight-into-tribal-heritage-varanasi-news-c-20-vns1056-1601897-2026-11-02

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