आगरा। यहां सिकंदरा में यमुना नदी के तट पर स्थित 5000 वर्ष पुराने श्री कैलाश महादेव मंदिर में सावन का महीना शुरू हो गया है। इस दौरान श्रद्धालु भोलेनाथ को चंदन का लेप लगाकर उनका दिव्य रूप निहारते हैं। सावन के पहले दिन से ही शिव भक्तों ने यहां चंदन शृंगार किया। मंदिर में शिवस्वरूपा भगवान शंकर और माता पार्वती के जुड़वां शिवलिंगों की विशेष पूजा-अर्चना की।
गर्मी और सावन के महीने में चंदन के शृंगार का विशेष महत्व है। भक्त महादेव को शीतलता प्रदान करने के लिए चंदन का लेप लगाते हैं। इससे मन को असीम शांति मिलती है। मान्यता है कि इन शिवलिंगों की स्थापना त्रेतायुग में स्वयं भगवान परशुराम और उनके पिता महर्षि जमदग्नि ने की थी। हर साल अगस्त या सितंबर में सावन के तीसरे सोमवार को यहां भव्य कैलाश लक्खी मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले में लाखों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं। यहां पूजा-अर्चना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। लक्खी माता लक्ष्मी को कहा जाता है, जिनकी पूजा शरद पूर्णिमा पर होती है। लक्खी को लाखी ( जंगल क्षेत्र) भी कहा जाता है, जहां लाखी महिला या पुरुष दोनों के नाम होते हैं। यह एक उभयलिंगी नाम है, जिसे कोई भी रख सकता है।
मंदिर की प्राचीनता और परंपरा
यह मंदिर 5000 वर्ष से भी अधिक पुराना माना जाता है। यहां सावन और भादों के महीने में चंदन शृंगार की परंपरा सदियों से चली आ रही है। भक्त एक ही जलहरी में शिवस्वरूपा भगवान शंकर और माता पार्वती के जुड़वां शिवलिंगों की पूजा करते हैं। मंदिर के पास ही श्याम कुटिर स्थित है, जहां राधा-कृष्ण के अद्भुत मिलन की गाथा जुड़ी है। यमुना नदी के तट पर स्थित होने के कारण इसकी पवित्रता और बढ़ जाती है।
कैलाश लक्खी मेला और महत्व
कैलाश महादेव मंदिर में हर साल अगस्त या सितंबर में भव्य कैलाश लक्खी मेले का आयोजन होता है। यह मेला सावन के तीसरे सोमवार को लगता है। इस दौरान लाखों की संख्या में श्रद्धालु दूर-दूर से यहां दर्शन के लिए आते हैं। मेले में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने से भक्तों को विशेष फल की प्राप्ति होती है। यह मेला क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान है।
धार्मिक पर्यटन का केंद्र
कैलाश महादेव मंदिर के आसपास कई अन्य महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल हैं। यहां से छह किलोमीटर दूर रुनकता में महर्षि जमदग्नि का रेणुका आश्रम स्थित है। करीब 40 किलोमीटर की दूरी पर भगवान श्री कृष्ण की जन्मभूमि मथुरा है। इसी दूरी पर राधा रानी की जन्मस्थली बरसाना भी है, जहां राधा रानी लाडली स्वरूप में विराजमान हैं। यमुना तट पर बसा वृंदावन धाम और धार्मिक पुराणों में विशेष महत्व रखने वाला गोवर्धन धाम भी यहां से कुछ दूरी पर है। यह क्षेत्र धार्मिक पर्यटन का एक अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है, यहां आने से मनुष्य जीवन सफल हो जाता है।

सावन में आगरा के सिकंदरा स्थित कैलाश मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना।

सावन में आगरा के सिकंदरा स्थित कैलाश मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना।

सावन में आगरा के सिकंदरा स्थित कैलाश मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना।
