झांसी। 28 मई की रात आई तेज आंधी ने बुंदेलखंड की बिजली व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर दिया था। जालौन के माधौगढ़ क्षेत्र में ट्रांसमिशन लाइन के 12 हाईटेंशन टावर गिर जाने से परीछा तापीय परियोजना से ग्रिड तक बिजली आपूर्ति का संपर्क टूट गया। इसके चलते परियोजना की चारों इकाइयों से विद्युत उत्पादन पूरी तरह बंद करना पड़ा।

परीछा तापीय परियोजना की चारों इकाइयों से कुल 940 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है। 28 और 29 मई को उत्पादन ठप रहने से झांसी, जालौन, ललितपुर समेत पूरे बुंदेलखंड में व्यापक बिजली कटौती करनी पड़ी। घरों, बाजारों और कार्यालयों में अंधेरा छा गया। अस्पतालों में भी बिजली संकट गहरा गया और पेयजल आपूर्ति प्रभावित हुई। इन्वर्टर और बैटरियां जवाब देने लगीं। 45 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच लंबे बिजली संकट ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं।

बिजली कटौती का असर किसानों, व्यापारियों और विद्यार्थियों पर भी पड़ा। किसान सिंचाई नहीं कर सके, दुकानदारों का काम प्रभावित हुआ और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को भी परेशानी झेलनी पड़ी। कई इलाकों में 18 से 20 घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रही।

परीछा तापीय परियोजना के मुख्य महाप्रबंधक आर.एन. श्रीवास्तव ने बताया कि परियोजना की इकाइयों में कोई तकनीकी खराबी नहीं आई थी। नुकसान केवल ट्रांसमिशन लाइन को हुआ। ट्रांसमिशन विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था कर 29 मई को 210-210 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट-3 और यूनिट-4 को चालू कर दिया। वहीं, 30 मई को 250-250 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट-5 और यूनिट-6 भी शुरू कर दी गईं।

उन्होंने बताया कि यूनिट-5 और 6 का उत्पादन धीरे-धीरे बढ़ाया जा रहा है। शनिवार देर रात तक चारों इकाइयों के पूर्ण क्षमता से संचालन की उम्मीद है। उधर, क्षतिग्रस्त टावरों और ट्रांसमिशन लाइन को दुरुस्त करने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। ट्रांसमिशन विभाग की टीमें बिजली व्यवस्था को पूरी तरह सामान्य बनाने में जुटी हैं।



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