600 गज में अपार्टमेंट, पार्किंग मे फ्लैट
स्थानीय लोगों के अनुसार पूरी इमारत महज 600 गज के भूखंड पर बनी है। इसमें तीन मंजिल में हैं और प्रत्येक मंजिल पर चार फ्लैट बनाए गए हैं। इस तरह कुल 12 फ्लैट हैं। नियम को ताक पर रखकर एक अतिरिक्त फ्लैट पार्किंग एरिया में भी बनाया गया है, जो सीधे तौर पर सुरक्षा मानकों का उल्लंघन है।
आरडब्ल्यूए है नहीं, फिर भी मेंटेनेंस 2000 रुपये प्रति माह
अपार्टमेंट के पड़ोस में रहने वाले नीरज वर्मा बताते हैं कि रसिक अपार्टमेंट में कोई भी रेजिडेंशियल वेलफेयर सोसाइटी नहीं है। बिल्डर स्वयं ही प्रत्येक परिवार से 2000 रुपये मासिक शुल्क रखरखाव के नाम पर ले रहे हैं, इसके बावजूद लिफ्ट का कोई रखरखाव नहीं किया गया। यह अपार्टमेंट वर्ष 2010-11 में बनकर तैयार हुआ था, जिसमें लगी लिफ्ट करीब 15 साल पुरानी है। इसे बिना मरम्मत के चलाया जा रहा था। शनिवार को हुए हादसे के बाद से पूरे अपार्टमेंट में डर का माहौल है। नीरज वर्मा ने बताया कि रसिक अपार्टमेंट में उनकी बेटी भी रहती है। लिफ्ट की खस्ताहाल स्थिति और हादसे के बाद उन्होंने अपनी बेटी को सख्त हिदायत दी है कि वह भूलकर भी लिफ्ट का बटन न दबाए और सीढ़ियों का ही उपयोग करे।
लिफ्ट पूरी तरह सही है : बिल्डर
अपार्टमेंट की लिफ्ट पूरी तरह सही है। प्रॉपर्टी डीलर ने लिफ्ट के नीचे आने से पहले ही उसका चैनल खोल दिया था, जिसके चलते हादसा हुआ। अपार्टमेंट का नक्शा उस समय के नियमों के मुताबिक है। पार्किंग एरिया में फ्लैट स्वीकृत है। जहां तक 600 गज के भूखंड की बात है तो उस समय इसी तरह नक्शा पास होता था। जो 2000 रुपये लिए जाते हैं वह केवल लिफ्ट के लिए नहीं बल्कि पूरे अपार्टमेंट के रखरखाव के लिए हैं। मैंने कई बार लोगों से सोसायटी बना कर जिम्मेदारी लेने के लिए कहा है। कोई आगे ही नहीं आ रहा है। – बांके बिहारी बंसल, बिल्डर, रसिक अपार्टमेंट
अपार्टमेंट की होगी जांच-एडीए
यह अपार्टमेंट वर्ष 2010-11 में बना है। उस समय के नियम के मुताबिक इसके नक्शा और अन्य पहलुओं की जांच होगी। हमने स्वत: संज्ञान लिया है। एक जांच कमेटी पूरे मामले की जांच करेगी। जांच में जो भी तथ्य दोषपूर्ण पाए जाएंगे उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। – राहुल विश्वकर्मा, सचिव, अलीगढ़ विकास प्राधिकरण
एडीए सचिव, सहायक निदेशक विद्युत सुरक्षा करेंगे जांच
रसिक अपार्टमेंट रामघाट रोड में लिफ्ट में तकनीकी खराबी के कारण हुए हादसे की जांच के लिए जिलाधिकारी अविनाश कुमार ने समिति गठित की है। इसमें सचिव, विकास अलीगढ़ विकास प्राधिकरण और सहायक निदेशक विद्युत सुरक्षा को शामिल किया गया है। समिति अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपेगी। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। परिवार वाले अगर लिखित तहरीर देते हैं तो अभियोग पंजीकृत कर विधिक कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। – किंशुक श्रीवास्तव, एडीएम सिटी
