NHM Contract Employees के आंदोलन ने अब नया मोड़ ले लिया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ (रजि.) के प्रदेश अध्यक्ष मयंक ठाकुर के आह्वान पर सोमवार से प्रदेशव्यापी आंदोलन के पहले चरण की शुरुआत हुई। मुजफ्फरनगर जनपद में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात संविदा कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर अपने नियमित कार्य का निर्वहन किया और अपनी लंबित मांगों को लेकर विरोध दर्ज कराया।
आंदोलन के दौरान कर्मचारियों ने स्वास्थ्य सेवाओं को तत्काल बंद करने के बजाय अपने कार्यस्थल पर रहकर सांकेतिक विरोध का रास्ता अपनाया। अलग-अलग स्वास्थ्य केंद्रों पर कर्मचारियों ने चिकित्सा अधीक्षकों को ज्ञापन सौंपे और सरकार तक अपनी मांगें पहुंचाने का प्रयास किया।
हालांकि, संगठन ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि मौजूदा चरण के बाद यदि सरकार की ओर से कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं आता है तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। संगठन के अनुसार, 8 अक्टूबर 2026 से पूर्ण कार्य बहिष्कार का कदम उठाया जा सकता है।
काली पट्टी बांधकर काम करते रहे एनएचएम कर्मचारी
आंदोलन के पहले दिन मुजफ्फरनगर जिले में एनएचएम संविदा कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर काम किया। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को तत्काल बाधित करना नहीं, बल्कि सरकार और शासन का ध्यान लंबे समय से लंबित मांगों की ओर आकर्षित करना बताया गया।
जिला अध्यक्ष डॉ. सचिन जैन के अनुसार, जिला चिकित्सालय पुरुष, जिला महिला चिकित्सालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और नगरीय स्वास्थ्य केंद्रों पर कार्यरत एनएचएम संविदा कर्मचारियों ने आंदोलन में भाग लिया।
कर्मचारियों ने अपने-अपने कार्यस्थलों पर काली पट्टी बांधकर विरोध जताया। कई स्थानों पर चिकित्सा अधीक्षकों को ज्ञापन भी सौंपे गए।
इस तरह आंदोलन का पहला चरण पूरे जिले में अलग-अलग स्वास्थ्य इकाइयों तक पहुंचा और कर्मचारियों ने एकजुट होकर अपनी मांगों के प्रति संगठनात्मक समर्थन दिखाया।
जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी-पीएचसी तक दिखा विरोध
NHM Contract Employees Muzaffarnagar आंदोलन की खास बात यह रही कि विरोध केवल किसी एक स्वास्थ्य केंद्र तक सीमित नहीं रहा। जिला अस्पताल से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक संविदा कर्मचारियों ने इसमें भागीदारी की।
स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न इकाइयों में काम करने वाले एनएचएम कर्मचारी स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों में अपनी भूमिका निभाते हैं। ऐसे में संगठन द्वारा चरणबद्ध तरीके से आंदोलन चलाने का निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पहले चरण में कर्मचारियों ने अपनी ड्यूटी जारी रखते हुए काली पट्टी बांधी। इसके बाद ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों को प्रशासन और सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
बघरा में डॉ. राहुल वर्मा के नेतृत्व में सौंपा गया ज्ञापन
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बघरा में एनएचएम संविदा कर्मचारियों ने डॉ. राहुल वर्मा के नेतृत्व में विरोध दर्ज कराया। कर्मचारियों ने चिकित्सा अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा और इसके बाद काली पट्टी बांधकर अपने कार्य का निर्वहन किया।
बघरा में हुए इस प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने संगठन की मांगों के समर्थन में एकजुटता दिखाई। संगठन की ओर से कहा गया कि वर्तमान आंदोलन कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांगों को सरकार के सामने मजबूती से रखने का माध्यम है।
कर्मचारियों का कहना है कि वे स्वास्थ्य सेवाओं में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए लंबे समय से अपनी समस्याओं के समाधान की अपेक्षा कर रहे हैं।
गालिबपुर में भी कर्मचारियों ने जताया विरोध
गालिबपुर में भी एनएचएम संविदा कर्मचारियों ने आंदोलन के पहले चरण में भाग लिया। यहां कर्मचारियों ने चिकित्सा अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा और काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराया।
अलग-अलग स्वास्थ्य केंद्रों पर एक ही तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाने से यह स्पष्ट हुआ कि संगठन ने आंदोलन को जिला स्तर पर व्यापक रूप देने की रणनीति अपनाई है।
कर्मचारियों की ओर से कहा गया कि काली पट्टी आंदोलन उनके असंतोष का सांकेतिक प्रदर्शन है और इसके जरिए सरकार को यह संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है कि उनकी मांगों को अब लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
पुरकाजी में भी सामने आया कर्मचारियों का आक्रोश
पुरकाजी में डॉ. असजद सामी के नेतृत्व में एनएचएम संविदा कर्मचारियों ने चिकित्सा अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा। इसके बाद कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया।
पुरकाजी स्वास्थ्य केंद्र पर कर्मचारियों की भागीदारी ने भी आंदोलन को जिले के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने में भूमिका निभाई।
संगठन का कहना है कि आंदोलन के इस चरण में कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हट रहे हैं। उनका उद्देश्य शांतिपूर्ण और चरणबद्ध तरीके से सरकार तक अपनी बात पहुंचाना है।
जिला महिला चिकित्सालय में भी काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन
जिला महिला चिकित्सालय में भी एनएचएम संविदा कर्मचारी आंदोलन में शामिल हुए। यहां संजय कुमार और डॉ. सुदेश वर्मा के नेतृत्व में कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया।
महिला चिकित्सालय में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में यहां कार्यरत कर्मचारियों द्वारा ड्यूटी के दौरान काली पट्टी बांधना आंदोलन के सांकेतिक स्वरूप को दर्शाता है।
संगठन की ओर से कहा गया कि कर्मचारियों की प्राथमिकता स्वास्थ्य सेवाओं को नुकसान पहुंचाना नहीं है। वे चाहते हैं कि उनकी मांगों पर सरकार सकारात्मक पहल करे और विवाद का समाधान बातचीत के जरिए निकले।
खतौली में डॉ. विकास और डॉ. भावना के नेतृत्व में आंदोलन
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खतौली में भी एनएचएम संविदा कर्मचारियों ने आंदोलन के पहले चरण में भाग लिया। यहां डॉ. विकास और डॉ. भावना के नेतृत्व में कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराया।
खतौली में कर्मचारियों ने भी आंदोलन को लेकर अपनी एकजुटता प्रदर्शित की। उनका कहना है कि वर्तमान चरण सांकेतिक विरोध का है और सरकार के रुख के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
शाहपुर में चिकित्सा अधीक्षक को सौंपा ज्ञापन
शाहपुर में डॉ. प्रवीण कुमार के नेतृत्व में एनएचएम संविदा कर्मचारियों ने चिकित्सा अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन सौंपने के बाद कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान संगठन की मांगों के समर्थन में कर्मचारियों ने अपनी एकजुटता दिखाई।
शाहपुर में भी आंदोलन का स्वरूप फिलहाल सांकेतिक रहा। कर्मचारियों ने अपनी ड्यूटी जारी रखते हुए सरकार के प्रति असंतोष जाहिर किया।
बुढ़ाना में भी आंदोलन का असर
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बुढ़ाना में भी एनएचएम संविदा कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर विरोध किया। इसके बाद चिकित्सा अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा गया।
बुढ़ाना में कर्मचारियों की भागीदारी से जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में भी आंदोलन के पहले चरण के पहुंचने की तस्वीर सामने आई।
संगठन का कहना है कि जिले के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों पर कर्मचारियों ने एक साथ आंदोलन में भाग लेकर यह संदेश दिया है कि लंबित मांगों को लेकर कर्मचारियों में व्यापक असंतोष है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मुख्यालय पर भी प्रदर्शन
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मुख्यालय पर डॉ. अजय प्रताप सिंह के नेतृत्व में कर्मचारियों ने चिकित्सा अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा।
इसके बाद सभी कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर संगठन के आंदोलन का समर्थन किया।
इस प्रकार मुजफ्फरनगर जिले के अलग-अलग स्वास्थ्य केंद्रों पर एक साथ विरोध कार्यक्रम आयोजित किए गए।
प्रदेश में एक लाख से अधिक कर्मचारियों के आंदोलन का दावा
डॉ. राहुल वर्मा ने बताया कि प्रदेश के सभी जनपदों में कार्यरत एक लाख से अधिक एनएचएम संविदा कर्मी आंदोलन के पहले चरण में काली पट्टी बांधकर अपनी ड्यूटी कर रहे हैं।
संगठन के अनुसार, यह आंदोलन कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांगों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।
कर्मचारी संगठन का दावा है कि उनकी समस्याओं को लेकर पहले भी सरकार के सामने मांगें रखी जाती रही हैं और कई बार आश्वासन भी मिले, लेकिन कर्मचारियों के अनुसार अपेक्षित स्थायी समाधान अभी तक नहीं हो पाया है।
यही कारण है कि संगठन ने चरणबद्ध आंदोलन का रास्ता अपनाया है।
तीन दिन तक जारी रहेगा काली पट्टी आंदोलन
डॉ. फैसल सिद्दीकी के अनुसार, आंदोलन के तहत अगले तीन दिनों तक सभी एनएचएम संविदा कर्मचारी काली पट्टी बांधकर अपने कार्य का निर्वहन करेंगे।
इस चरण में कर्मचारी स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह बंद करने के बजाय ड्यूटी करते हुए विरोध दर्ज करा रहे हैं।
संगठन के लिए यह चरण सरकार को बातचीत और समाधान का अवसर देने के रूप में भी देखा जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि इस अवधि में उनकी मांगों पर सरकार की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया आती है तो आंदोलन को आगे बढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
लेकिन यदि ऐसा नहीं होता है तो संगठन ने अगले चरण में अधिक कठोर आंदोलन की चेतावनी दी है।
8 अक्टूबर से पूर्ण कार्य बहिष्कार की चेतावनी
आंदोलन का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील हिस्सा 8 अक्टूबर 2026 से पूर्ण कार्य बहिष्कार की चेतावनी है।
डॉ. फैसल सिद्दीकी ने कहा कि यदि सरकार द्वारा कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता है तो 8 अक्टूबर से कार्य बंद कर पूर्ण हड़ताल की जाएगी।
इस घोषणा ने आंदोलन को अगले चरण में संभावित रूप से अधिक प्रभावी बना दिया है, क्योंकि एनएचएम के तहत कार्यरत संविदा कर्मचारी स्वास्थ्य सेवाओं की विभिन्न व्यवस्थाओं से जुड़े होते हैं।
हालांकि, संगठन की ओर से यह भी कहा गया है कि उसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करना नहीं है। संगठन चाहता है कि सरकार समय रहते कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करे, ताकि कार्य बहिष्कार जैसी स्थिति पैदा ही न हो।
जिला अध्यक्ष डॉ. सचिन जैन बोले—यह आखिरी चेतावनी
जिला अध्यक्ष डॉ. सचिन जैन ने आंदोलन को लेकर सरकार को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि यह सरकार के लिए आखिरी चेतावनी है।
उनके अनुसार, एनएचएम संविदा कर्मचारी लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं और बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हुआ है।
डॉ. जैन ने कहा कि यदि सरकार अब भी कर्मचारियों की मांगों पर ध्यान नहीं देती है तो 8 अक्टूबर से प्रस्तावित पूर्ण कार्य बहिष्कार की जिम्मेदारी सरकार एवं शासन-प्रशासन की होगी।
यह बयान आंदोलन के अगले चरण को लेकर संगठन के रुख को स्पष्ट करता है।
कर्मचारियों ने कहा—स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित करना प्राथमिकता नहीं
आंदोलन के बीच संगठन ने यह स्पष्ट करने की कोशिश की है कि उसका उद्देश्य मरीजों को परेशान करना या स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित करना नहीं है।
डॉ. सचिन जैन ने कहा कि संगठन की प्राथमिकता स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करना नहीं, बल्कि सरकार तक कर्मचारियों की जायज मांगों को मजबूती से पहुंचाना है।
यही वजह है कि आंदोलन की शुरुआत काली पट्टी बांधकर ड्यूटी करने से की गई है। संगठन के अनुसार, कर्मचारी इस चरण में अपने नियमित दायित्वों को निभाते हुए सरकार के प्रति विरोध दर्ज करा रहे हैं।
यदि सरकार बातचीत के जरिए समाधान की दिशा में आगे बढ़ती है तो आंदोलन को आगे बढ़ाने की आवश्यकता नहीं होगी।
काली पट्टी आंदोलन का संदेश क्या है?
काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन आम तौर पर किसी मांग या निर्णय के खिलाफ शांतिपूर्ण और सांकेतिक असहमति का तरीका माना जाता है।
एनएचएम संविदा कर्मचारियों ने भी आंदोलन की शुरुआत इसी तरीके से की है। कर्मचारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में मौजूद रहे, अपनी ड्यूटी की और साथ ही काली पट्टी बांधकर सरकार के सामने अपनी नाराजगी दर्ज कराई।
इस रणनीति का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि कर्मचारी संगठन ने शुरुआत में पूर्ण काम बंद करने के बजाय चरणबद्ध आंदोलन का रास्ता चुना है।
लेकिन 8 अक्टूबर से पूर्ण कार्य बहिष्कार की चेतावनी यह संकेत देती है कि यदि बातचीत से समाधान नहीं निकलता है तो आंदोलन का प्रभाव स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है।
मुजफ्फरनगर में क्यों महत्वपूर्ण है यह आंदोलन?
मुजफ्फरनगर जैसे बड़े जिले में एनएचएम के तहत कार्यरत संविदा कर्मचारियों की भूमिका स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। जिला अस्पताल, महिला चिकित्सालय, सीएचसी, पीएचसी और नगरीय स्वास्थ्य केंद्रों में अलग-अलग स्तर पर कर्मचारी स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कार्यों में योगदान करते हैं।
ऐसे में संगठन की ओर से पूर्ण कार्य बहिष्कार का निर्णय लिया जाता है तो उसका असर स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित व्यवस्था पर पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
हालांकि फिलहाल ऐसा कोई पूर्ण कार्य बहिष्कार शुरू नहीं हुआ है। मौजूदा चरण में कर्मचारी काली पट्टी बांधकर कार्य कर रहे हैं और विभिन्न केंद्रों पर ज्ञापन सौंपे गए हैं।
सरकार के सामने अब क्या चुनौती है?
एनएचएम संविदा कर्मचारियों के आंदोलन के बाद सरकार के सामने सबसे महत्वपूर्ण चुनौती संवाद और समाधान की होगी।
यदि सरकार और कर्मचारी संगठन के बीच बातचीत होती है और मांगों पर कोई सकारात्मक पहल सामने आती है तो आंदोलन को आगे बढ़ने से रोका जा सकता है।
दूसरी ओर, यदि संगठन को लगता है कि उसकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो 8 अक्टूबर से पूर्ण कार्य बहिष्कार की घोषणा को अमल में लाया जा सकता है।
इस स्थिति में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण मरीजों और स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता होगी। किसी भी आंदोलन के दौरान आपातकालीन और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं पर असर न पड़े, यह प्रशासन और आंदोलनरत कर्मचारियों दोनों के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी।
आंदोलन का अगला चरण अब सरकार के रुख पर निर्भर
फिलहाल एनएचएम संविदा कर्मचारियों का आंदोलन पहले चरण में है। कर्मचारी काली पट्टी बांधकर अपनी ड्यूटी कर रहे हैं और विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों पर ज्ञापन सौंप रहे हैं।
आंदोलन की अगली दिशा सरकार की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी। संगठन ने तीन दिनों के काली पट्टी आंदोलन के बाद 8 अक्टूबर से पूर्ण कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी है।
इसलिए आने वाले दिनों में सरकार और कर्मचारी संगठन के बीच बातचीत या किसी सकारात्मक पहल की संभावना पर सभी की नजर रहेगी।
मुजफ्फरनगर में आंदोलन की व्यापकता को देखते हुए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर भी स्थिति पर नजर रखी जाना स्वाभाविक है। खासतौर पर यदि आंदोलन अगले चरण में पहुंचता है तो मरीजों की सुविधा और स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए अहम विषय रहेगा।
एनएचएम कर्मचारियों की मांगों पर फैसले का इंतजार
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संविदा व्यवस्था में काम कर रहे कर्मचारियों का यह आंदोलन लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर उनके असंतोष को सामने ला रहा है। संगठन का कहना है कि कर्मचारी लगातार अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं के स्थायी समाधान की आवश्यकता बनी हुई है।
मुजफ्फरनगर में सोमवार को हुए विरोध कार्यक्रम में जिला अस्पताल से लेकर ग्रामीण और नगरीय स्वास्थ्य केंद्रों तक कर्मचारियों की भागीदारी दिखाई दी। अलग-अलग स्थानों पर नेतृत्व करने वाले चिकित्सकों और कर्मचारियों ने ज्ञापन सौंपकर संगठन की मांगों का समर्थन किया।
अब देखना यह होगा कि सरकार इस चरणबद्ध आंदोलन को किस तरह लेती है और क्या 8 अक्टूबर से पहले कोई ऐसी पहल होती है जिससे पूर्ण कार्य बहिष्कार की नौबत टाली जा सके।
